जगदलपुर/बस्तर | छत्तीसगढ़ के बस्तर संभाग में नक्सलवाद के खिलाफ सुरक्षा बलों को अब तक की सबसे बड़ी और ऐतिहासिक कामयाबी मिली है। माओवादी संगठन के ‘भीष्म पितामह’ और दशकों से दंडकारण्य के जंगलों में खौफ का पर्याय बने डीकेएसजेडसी (DKSZC) सदस्य पाप्पा राव ने अपने 17 साथियों के साथ आत्मसमर्पण कर दिया है। इसे बस्तर में नक्सलवाद के अंत की शुरुआत के रूप में देखा जा रहा है।
प्रमुख कैडरों का मोहभंग: बड़े चेहरों ने छोड़ी बंदूक
इस आत्मसमर्पण की सबसे खास बात यह है कि इसमें संगठन के वे चेहरे शामिल हैं जो दशकों से पुलिस के लिए चुनौती बने हुए थे।
- पाप्पा राव: साउथ सब जोनल ब्यूरो का इंचार्ज और माओवादी रणनीतियों का मुख्य सूत्रधार।
- प्रकाश मड़वी और अनिल ताती: दोनों ही डीवीसी मेंबर (DVCM) स्तर के बड़े नक्सली नेता हैं।
- महिला शक्ति का पलायन: आत्मसमर्पण करने वाले इस दल में 7 महिला नक्सली भी शामिल हैं, जो संगठन के भीतर सक्रिय कैडर और सूचना तंत्र की रीढ़ मानी जाती थीं।
हथियारों के साथ मुख्यधारा में वापसी
जानकारी के अनुसार, इन नक्सलियों ने केवल सरेंडर ही नहीं किया, बल्कि संगठन के घातक हथियारों का जखीरा भी सुरक्षा बलों को सौंपा है। इसमें ए.के.-47 राइफल, आधुनिक इंसास और अन्य हथियार शामिल हैं। यह कदम दर्शाता है कि अब नक्सलियों का अपनी ही विचारधारा और नेतृत्व से भरोसा पूरी तरह उठ चुका है।
आत्मसमर्पण के पीछे के बड़े कारण
विशेषज्ञों और सूत्रों के अनुसार, इस सामूहिक आत्मसमर्पण के पीछे तीन मुख्य कारण माने जा रहे हैं:
- सुरक्षा बलों का बढ़ता दबाव: बस्तर के अंदरूनी इलाकों में नए सुरक्षा कैंपों की स्थापना ने नक्सलियों की रसद और मूवमेंट को सीमित कर दिया है।
- पुनर्वास नीति का प्रभाव: शासन की ‘नियत नेल्लानार’ जैसी योजनाओं और पुनर्वास नीति के तहत मिलने वाली सुविधाओं ने नक्सलियों को हिंसा छोड़ने के लिए प्रेरित किया है।
- भेदभाव और शोषण: आत्मसमर्पण करने वालों ने संकेत दिया है कि वे संगठन के भीतर बाहरी नेतृत्व के दबाव और स्थानीय कैडरों के साथ होने वाले भेदभाव से त्रस्त थे।
नक्सली संगठन को अपूरणीय क्षति
पाप्पा राव जैसे कद्दावर नेता का संगठन छोड़ना माओवादियों के लिए एक बड़ा ‘ब्रेन ड्रेन’ (बौद्धिक क्षति) है। पाप्पा राव को बस्तर की भौगोलिक स्थिति और सुरक्षा बलों की रणनीति की गहरी समझ थी। उसके मुख्यधारा में आने से नक्सली सूचना तंत्र पूरी तरह ध्वस्त होने की कगार पर है।
प्रशासन का पक्ष
बस्तर पुलिस और प्रशासन ने इस कदम का स्वागत किया है। अधिकारियों का कहना है कि इन सभी पूर्व माओवादियों को सरकार की पुनर्वास नीति के तहत तत्काल सहायता, आवास और रोजगार के अवसर प्रदान किए जाएंगे ताकि वे समाज की मुख्यधारा में सम्मानपूर्वक जीवन जी सकें।