भिलाई | 01 अप्रैल 2026 निजी स्कूलों द्वारा अभिभावकों के किए जा रहे आर्थिक शोषण और बढ़ती मनमानी के खिलाफ आम आदमी पार्टी (AAP) ने मोर्चा खोल दिया है। आज नेता जसप्रीत सिंह के नेतृत्व में कार्यकर्ताओं और अभिभावकों ने दुर्ग जिला कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर स्कूलों के ‘सिंडिकेट’ को तोड़ने और बस किराए में पारदर्शिता लाने की मांग की।
प्रमुख मुद्दे: जहाँ हो रहा है अभिभावकों का शोषण
ज्ञापन में निजी स्कूलों द्वारा अपनाई जा रही उन प्रक्रियाओं का कच्चा चिट्ठा खोला गया है, जो सीधे तौर पर मध्यमवर्गीय परिवारों की जेब पर भारी पड़ रही हैं:
- बस किराए में ‘मनमाना’ अंतर: हैरानी की बात है कि एक ही रूट पर अलग-अलग स्कूलों के किराए में भारी विसंगति है।
- शंकराचार्य स्कूल (सेक्टर 10): कम दूरी के लिए ₹2,250 वसूल रहा है।
- के.पी.एस. नेहरू नगर: अधिक दूरी होने के बावजूद मात्र ₹1,150 ले रहा है। यह उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम 2019 का खुला उल्लंघन है।
- किताब-ड्रेस का ‘छद्म एकाधिकार’: स्कूल प्रबंधन जानबूझकर ऐसे प्रकाशकों की किताबें और विशिष्ट ड्रेस निर्धारित करते हैं जो शहर के सामान्य दुकानों पर नहीं मिलतीं। अभिभावकों को तिवारी बुक डिपो जैसे चुनिंदा केंद्रों से महंगे दामों पर सामान खरीदने को मजबूर किया जा रहा है।
- मानसिक प्रताड़ना: मार्च में परीक्षाएं खत्म होने के बाद भी पूरे महीने का बस किराया वसूलना और फीस की देरी पर बच्चों का रिजल्ट रोकना अनैतिक और अनुचित है।
“शिक्षा व्यवसाय नहीं, सेवा है”
नेत्रित्व कर रहे जसप्रीत सिंह ने कड़े शब्दों में चेतावनी देते हुए कहा:
”शिक्षा को व्यापार बना चुके इन संस्थानों पर अगर प्रशासन ने तत्काल लगाम नहीं कसी, तो आम आदमी पार्टी अभिभावकों के साथ मिलकर उग्र आंदोलन करेगी। हम बच्चों के भविष्य और माता-पिता की गाढ़ी कमाई को इस तरह लुटने नहीं देंगे।”