अब होटल या रेस्टोरेंट में खाना खाने के बाद बिल में ‘LPG चार्ज’, ‘गैस सरचार्ज’ या ‘फ्यूल कॉस्ट’ जैसे अतिरिक्त शुल्क दिखने पर उपभोक्ता सीधे आपत्ति दर्ज करा सकते हैं। केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण (CCPA) ने एक नई एडवाइजरी जारी कर इन शुल्कों को ‘अनुचित व्यापार प्रथा’ (Unfair Trade Practice) करार देते हुए इन पर तत्काल रोक लगा दी है।
पारदर्शिता की कमी और उपभोक्ताओं को गुमराह करने का आरोप
प्राधिकरण को लगातार शिकायतें मिल रही थीं कि कई रेस्टोरेंट मेन्यू कार्ड में दी गई कीमतों और टैक्स के अलावा चुपके से ईंधन की लागत (Fuel Cost Recovery) वसूल रहे हैं। CCPA ने स्पष्ट किया है कि गैस, बिजली और ईंधन का खर्च किसी भी बिजनेस को चलाने की लागत का हिस्सा है। इसे खाने की कीमत (Base Price) में ही शामिल किया जाना चाहिए, न कि बिल में अलग से जोड़कर ग्राहकों को भ्रमित करना चाहिए।
नियमों से बचने की ‘नई तरकीब’ पर प्रहार
इससे पहले ‘सर्विस चार्ज’ को लेकर भी इसी तरह के विवाद सामने आए थे। CCPA ने साफ कर दिया है कि अगर रेस्टोरेंट नाम बदलकर (जैसे- सरचार्ज या रिकवरी शुल्क) ग्राहकों से अतिरिक्त पैसा वसूलते हैं, तो इसे नियमों का उल्लंघन माना जाएगा। होटल और रेस्टोरेंट को यह सुनिश्चित करना होगा कि मेन्यू में अंकित दर ही अंतिम कीमत हो, जिसके ऊपर केवल सरकार द्वारा निर्धारित टैक्स (GST) ही लगाया जा सकता है।
ग्राहक क्या करें?
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