नई दिल्ली/अमरावती: आंध्र प्रदेश की राजधानी को लेकर लंबे समय से चली आ रही अनिश्चितता अब समाप्त हो गई है। केंद्र सरकार ने लोकसभा में एक महत्वपूर्ण विधेयक पारित कर दिया है, जिसके तहत अब ‘अमरावती’ आधिकारिक तौर पर आंध्र प्रदेश की स्थायी राजधानी होगी। इस फैसले के साथ ही राज्य में ‘तीन राजधानियों’ के विवादास्पद प्रस्ताव पर पूरी तरह से विराम लग गया है।
कानूनी अड़चनों का हुआ अंत विगत कुछ वर्षों से आंध्र प्रदेश में राजधानियों को लेकर राजनीतिक और कानूनी खींचतान चल रही थी। पिछली सरकार द्वारा विशाखापत्तनम, कुरनूल और अमरावती को अलग-अलग श्रेणियों की राजधानी बनाने का प्रस्ताव दिया गया था, जिसका किसानों और स्थानीय निवासियों ने कड़ा विरोध किया था। मामला सुप्रीम कोर्ट तक भी पहुँचा था। अब संसद के निचले सदन यानी लोकसभा में विधेयक पारित होने के बाद अमरावती के विकास का रास्ता साफ हो गया है।
विकास को मिलेगी नई गति संसद के इस फैसले का अमरावती के उन हजारों किसानों ने स्वागत किया है जिन्होंने अपनी जमीन राजधानी निर्माण के लिए दी थी। विशेषज्ञों का मानना है कि इस स्पष्टता के बाद अब अमरावती में बुनियादी ढांचे, अंतरराष्ट्रीय निवेश और सरकारी कार्यालयों के निर्माण में तेजी आएगी। केंद्र सरकार ने भी संकेत दिए हैं कि राजधानी के विकास के लिए आवश्यक वित्तीय सहायता सुनिश्चित की जाएगी।