शराब नीति मामला: जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा की बेंच से केस ट्रांसफर करने के लिए सुप्रीम कोर्ट पहुंचे अरविंद केजरीवाल

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नई दिल्ली: आम आदमी पार्टी (AAP) के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने आबकारी नीति (शराब नीति) मामले में सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। उन्होंने दिल्ली हाईकोर्ट के उस फैसले को चुनौती देते हुए रिट याचिका दायर की है, जिसमें सीबीआई (CBI) की अपील पर सुनवाई कर रहीं जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा की बेंच से इस मामले को किसी अन्य बेंच में ट्रांसफर करने की उनकी मांग खारिज कर दी गई थी।

क्या है पूरा मामला?

​केजरीवाल ने दिल्ली हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल के उस आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में रिट याचिका दायर की है, जो हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस के निर्देशों के आधार पर जारी किया गया था।

​चीफ जस्टिस ने केजरीवाल की बेंच बदलने की अपील को यह कहते हुए खारिज कर दिया था कि यह मामला मौजूदा रोस्टर के अनुसार ही जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा को सौंपा गया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया था कि इस मामले को किसी दूसरी बेंच के पास भेजने का कोई उचित या ठोस कारण नहीं है।

केजरीवाल ने बेंच बदलने की मांग क्यों की?

​बेंच पर सवाल उठाने के पीछे मुख्य रूप से दो कारण बताए गए हैं:

  • जज की टिप्पणियां: 27 फरवरी को ट्रायल कोर्ट ने केजरीवाल समेत 23 आरोपियों को बरी कर दिया था। सीबीआई ने इसके खिलाफ हाईकोर्ट में पुनर्विचार याचिका दायर की, जिस पर जस्टिस शर्मा ने सुनवाई की। 9 मार्च को उन्होंने प्रथम दृष्टया (Prima Facie) टिप्पणी की कि ट्रायल कोर्ट की टिप्पणियां गलत प्रतीत होती हैं। केजरीवाल का तर्क है कि इस टिप्पणी के पीछे कोई विशिष्ट कारण दर्ज नहीं किया गया।
  • पूर्व के फैसले: केजरीवाल ने चीफ जस्टिस को लिखे पत्र में तर्क दिया है कि जस्टिस शर्मा ने इससे पहले भी शराब नीति मामले में कई आरोपियों को जमानत देने से इनकार किया था, जिन्हें बाद में सुप्रीम कोर्ट से राहत मिली थी।
  • निष्पक्षता पर आशंका: इन आधारों पर केजरीवाल ने मामले को दूसरी बेंच में ट्रांसफर करने की मांग करते हुए कहा है कि उन्हें “गंभीर, वास्तविक और उचित आशंका है कि इस मामले की सुनवाई पूरी निष्पक्षता और तटस्थता के साथ नहीं हो पाएगी।”

सुप्रीम कोर्ट में दो अलग-अलग याचिकाएं

​अरविंद केजरीवाल ने इस पूरे मामले में सुप्रीम कोर्ट में दो अलग-अलग कदम उठाए हैं:

  1. रिट याचिका: दिल्ली हाईकोर्ट द्वारा बेंच ट्रांसफर की मांग खारिज किए जाने के आदेश के खिलाफ।
  2. विशेष अनुमति याचिका (SLP): ट्रायल कोर्ट के आदेश के खिलाफ जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा द्वारा की गई टिप्पणियों को चुनौती देने के लिए एक अलग SLP भी दायर की गई है।

मामले का बैकग्राउंड (Trial Court का फैसला)

​27 फरवरी को ट्रायल कोर्ट ने इस मामले में बड़ा फैसला सुनाते हुए अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया और के. कविता सहित सभी 23 आरोपियों को बरी कर दिया था। कोर्ट ने सीबीआई (CBI) की जांच प्रक्रिया की भी कड़ी आलोचना की थी।

​यह मामला शुरू से ही भारी राजनीतिक विवाद का केंद्र रहा है। 2024 के लोकसभा चुनावों के दौरान केजरीवाल को गिरफ्तार किया गया था और 156 दिनों की हिरासत के बाद सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें जमानत दी थी। इसी मामले में AAP के वरिष्ठ नेता मनीष सिसोदिया को भी 530 दिन जेल में बिताने पड़े थे। अब इस मामले में सीबीआई की अपील पर हाईकोर्ट में सुनवाई चल रही है।

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