रायपुर: मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की अध्यक्षता में आज मंत्रालय (महानदी भवन) में आयोजित कैबिनेट की महत्वपूर्ण बैठक संपन्न हुई। इस बैठक में राज्य सरकार ने एक बड़ा कदम उठाते हुए ‘छत्तीसगढ़ धर्म स्वातंत्र्य विधेयक, 2026’ के प्रारूप को मंजूरी दे दी है।
विधेयक के मुख्य बिंदु:
इस नए कानून का प्राथमिक उद्देश्य राज्य में अवैध और जबरन धर्मांतरण पर कड़ाई से रोक लगाना है। कैबिनेट द्वारा अनुमोदित इस विधेयक में निम्नलिखित आधारों पर होने वाले धर्मांतरण को अपराध की श्रेणी में रखा जाएगा:
- बल प्रयोग (Force): डरा-धमका कर किया गया परिवर्तन।
- प्रलोभन (Allurement): किसी भी तरह का लालच या फायदा दिखाकर।
- कपटपूर्ण नीति (Fraud): धोखे या षड्यंत्र के माध्यम से।
- अनुचित प्रभाव या मिथ्या निरूपण: गलत जानकारी देकर या दबाव बनाकर।
क्यों है यह महत्वपूर्ण?
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में सरकार का मानना है कि यह विधेयक राज्य की सांस्कृतिक और धार्मिक स्वतंत्रता को अक्षुण्ण बनाए रखने में मदद करेगा। इस कानून के लागू होने से उन तत्वों पर लगाम कसी जा सकेगी जो भोले-भले लोगों को भ्रमित कर उनका धर्म परिवर्तन कराते हैं।
अगला कदम: कैबिनेट से मंजूरी मिलने के बाद अब इस विधेयक को आगामी विधानसभा सत्र में पटल पर रखा जाएगा, जहाँ इस पर विस्तृत चर्चा होगी।