बड़ी खबर: अंबिकापुर वन विभाग का काला कारनामा; लापरवाही ने ली मासूम बेजुबानों की जान

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अंबिकापुर: छत्तीसगढ़ के अंबिकापुर स्थित संजय पार्क से एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है। वन विभाग और पार्क प्रबंधन की घोर लापरवाही के कारण दर्जनों हिरण और कोटरी काल के गाल में समा गए। मामले को उजागर होने से बचाने के लिए अधिकारियों द्वारा साक्ष्यों को मिटाने की भी कोशिश की गई है।

कैसे हुई घटना?

​मिली जानकारी के अनुसार, शनिवार दोपहर संजय पार्क के बाड़े का गेट खुला रह गया था। इसी चूक का फायदा उठाकर 4 से 5 शिकारी कुत्ते बाड़े के भीतर घुस गए। कुत्तों ने वहां मौजूद हिरण, कोटरी और बारहसिंगा पर जानलेवा हमला कर दिया।

  • मौत का आंकड़ा: सूत्रों के मुताबिक, इस हमले में 15 से 16 हिरण और कोटरी की मौत हो गई है।
  • मौजूदा स्थिति: बताया जा रहा है कि अभी भी एक बाड़े में हिरण का शव पड़ा हुआ है, जिसे ठिकाने नहीं लगाया जा सका है।

साजिश: सबूत मिटाने के लिए जंगल में जलाई गई चिता

​घटना की गंभीरता को देखते हुए संजय पार्क प्रबंधन और वन विभाग के आला अधिकारियों ने इसे दबाने की पूरी साजिश रची।

  • गुपचुप अंतिम संस्कार: घटना की खबर बाहर न फैले, इसके लिए पार्क के ठीक पीछे जंगल में शवों को जला दिया गया।
  • मिले अवशेष: मौके पर चिता से हिरण और कोटरी के अवशेष बरामद हुए हैं।
  • संदिग्ध हथियार: जहां चिता जलाई गई, वहां से खून से सना एक धारदार हथियार भी मिला है, जो मामले को और भी संदिग्ध बनाता है।
  • पर्दादारी: साक्ष्यों को छिपाने के लिए जंगल के उस हिस्से को ग्रीन पर्दे से घेरकर बाउंड्री कर दी गई और अवशेषों को दफनाने की कोशिश की गई।

नियमों की धज्जियां: बिना अनुमति चल रहा था खेल

​जांच में यह बड़ा खुलासा भी हुआ है कि संजय पार्क में इन वन्यजीवों को रखने के लिए सेंट्रल जू अथॉरिटी (CZA) से अनुमति नहीं ली गई थी। बिना वैधानिक अनुमति के इतनी बड़ी संख्या में हिरण और कोटरी को रखना वन विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करता है।

मुख्य बिंदु:

  • ​बाड़े का गेट खुला छोड़ना प्रबंधन की पहली बड़ी चूक।
  • ​आवारा कुत्तों का सुरक्षित क्षेत्र में प्रवेश सुरक्षा पर सवाल।
  • ​बिना पोस्टमार्टम और पंचनामा के शवों को जलाना कानूनन अपराध।

इस मामले ने एक बार फिर वन्यजीवों के संरक्षण के दावों की पोल खोल दी है। क्या जिम्मेदार अधिकारियों पर कड़ी कार्रवाई होगी?

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