अंबिकापुर: छत्तीसगढ़ के अंबिकापुर स्थित संजय पार्क से एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है। वन विभाग और पार्क प्रबंधन की घोर लापरवाही के कारण दर्जनों हिरण और कोटरी काल के गाल में समा गए। मामले को उजागर होने से बचाने के लिए अधिकारियों द्वारा साक्ष्यों को मिटाने की भी कोशिश की गई है।
मिली जानकारी के अनुसार, शनिवार दोपहर संजय पार्क के बाड़े का गेट खुला रह गया था। इसी चूक का फायदा उठाकर 4 से 5 शिकारी कुत्ते बाड़े के भीतर घुस गए। कुत्तों ने वहां मौजूद हिरण, कोटरी और बारहसिंगा पर जानलेवा हमला कर दिया।
घटना की गंभीरता को देखते हुए संजय पार्क प्रबंधन और वन विभाग के आला अधिकारियों ने इसे दबाने की पूरी साजिश रची।
जांच में यह बड़ा खुलासा भी हुआ है कि संजय पार्क में इन वन्यजीवों को रखने के लिए सेंट्रल जू अथॉरिटी (CZA) से अनुमति नहीं ली गई थी। बिना वैधानिक अनुमति के इतनी बड़ी संख्या में हिरण और कोटरी को रखना वन विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
मुख्य बिंदु:
- बाड़े का गेट खुला छोड़ना प्रबंधन की पहली बड़ी चूक।
- आवारा कुत्तों का सुरक्षित क्षेत्र में प्रवेश सुरक्षा पर सवाल।
- बिना पोस्टमार्टम और पंचनामा के शवों को जलाना कानूनन अपराध।
इस मामले ने एक बार फिर वन्यजीवों के संरक्षण के दावों की पोल खोल दी है। क्या जिम्मेदार अधिकारियों पर कड़ी कार्रवाई होगी?
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