कोल्लम, केरल उपभोक्ता अधिकारों के संरक्षण की दिशा में कोल्लम जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग ने एक ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। आयोग ने स्पष्ट किया है कि यदि कोई ई-कॉमर्स विक्रेता विज्ञापन में दिखाए गए वजन से कम मात्रा में उत्पाद भेजता है, तो यह उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 के तहत न केवल उत्पाद में ‘दोष’ (Defect) है, बल्कि यह भ्रामक विज्ञापन और अनुचित व्यापार व्यवहार (Unfair Trade Practice) की श्रेणी में आता है।
मामले का विवरण: एक विधि छात्र की कानूनी लड़ाई
यह मामला एक कानून के छात्र (Law Student) द्वारा दायर किया गया था। शिकायतकर्ता ने एक दुर्घटना के बाद शारीरिक सहायता (Ergonomic Support) के लिए फ्लिपकार्ट के माध्यम से विक्रेता ‘लक्ष्मी एंटरप्राइजेज’ से 2 किलोग्राम वजन के बीन बैग ग्रेन्स का ऑर्डर दिया था।
घटनाक्रम:
- 7 सितंबर 2024: 2 किलो वजन के उत्पाद का ऑर्डर दिया गया।
- 14 सितंबर 2024: डिलीवरी मिली, लेकिन वजन केवल 1.540 किलोग्राम निकला।
- 23 सितंबर 2024 (पहला रिप्लेसमेंट): शिकायत के बाद बदला गया उत्पाद मिला, जिसका वजन और भी कम—1.470 किलोग्राम निकला।
- 4 अक्टूबर 2024 (दूसरा रिप्लेसमेंट): दोबारा शिकायत पर मिला उत्पाद भी केवल 1.680 किलोग्राम का था।
बार-बार शिकायत के बावजूद विक्रेता ने पूरा 2 किलो वजन देने में असमर्थता दिखाई, जिससे उपभोक्ता को शारीरिक कष्ट और भारी मानसिक तनाव का सामना करना पड़ा।
आयोग की महत्वपूर्ण टिप्पणियाँ और कानूनी आधार
आयोग की अध्यक्षता श्रीमती एस.के. श्रीला (अध्यक्ष) और श्री स्टैनली हेरोल्ड (सदस्य) कर रहे थे। सुनवाई के दौरान आयोग ने निम्नलिखित मुख्य बातें कहीं:
- मात्रा की कमी भी ‘दोष’ है: अधिनियम की धारा 2(10) के अनुसार, उत्पाद के वजन या मात्रा में कमी को स्पष्ट रूप से ‘दोष’ माना जाएगा।
- ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म की जिम्मेदारी: फ्लिपकार्ट ने तर्क दिया कि वह केवल एक ‘मध्यस्थ’ (Intermediary) है। हालांकि, आयोग ने इसे खारिज करते हुए कहा कि यदि किसी प्लेटफॉर्म पर बार-बार ऐसी शिकायतें आती हैं, तो वह अपनी जिम्मेदारी से पूरी तरह मुक्त नहीं हो सकता।
- भ्रामक विज्ञापन: विज्ञापन में 2 किलो का दावा करना और कम वजन भेजना ग्राहकों के साथ धोखाधड़ी है।
आयोग का सख्त फैसला और दंड
आयोग ने विक्रेता ‘लक्ष्मी एंटरप्राइजेज’ को दोषी पाया और फ्लिपकार्ट की जिम्मेदारी भी तय की।
यह फैसला ई-कॉमर्स कंपनियों और ऑनलाइन विक्रेताओं के लिए एक कड़ा संदेश है। यह दर्शाता है कि डिजिटल युग में भी उपभोक्ताओं की सुरक्षा सर्वोपरि है और तकनीकी खामियों या ‘मध्यस्थ’ होने का बहाना बनाकर कंपनियां अपनी जवाबदेही से बच नहीं सकतीं।