कोल्लम, केरल उपभोक्ता अधिकारों के संरक्षण की दिशा में कोल्लम जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग ने एक ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। आयोग ने स्पष्ट किया है कि यदि कोई ई-कॉमर्स विक्रेता विज्ञापन में दिखाए गए वजन से कम मात्रा में उत्पाद भेजता है, तो यह उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 के तहत न केवल उत्पाद में ‘दोष’ (Defect) है, बल्कि यह भ्रामक विज्ञापन और अनुचित व्यापार व्यवहार (Unfair Trade Practice) की श्रेणी में आता है।
यह मामला एक कानून के छात्र (Law Student) द्वारा दायर किया गया था। शिकायतकर्ता ने एक दुर्घटना के बाद शारीरिक सहायता (Ergonomic Support) के लिए फ्लिपकार्ट के माध्यम से विक्रेता ‘लक्ष्मी एंटरप्राइजेज’ से 2 किलोग्राम वजन के बीन बैग ग्रेन्स का ऑर्डर दिया था।
घटनाक्रम:
बार-बार शिकायत के बावजूद विक्रेता ने पूरा 2 किलो वजन देने में असमर्थता दिखाई, जिससे उपभोक्ता को शारीरिक कष्ट और भारी मानसिक तनाव का सामना करना पड़ा।
आयोग की अध्यक्षता श्रीमती एस.के. श्रीला (अध्यक्ष) और श्री स्टैनली हेरोल्ड (सदस्य) कर रहे थे। सुनवाई के दौरान आयोग ने निम्नलिखित मुख्य बातें कहीं:
आयोग ने विक्रेता ‘लक्ष्मी एंटरप्राइजेज’ को दोषी पाया और फ्लिपकार्ट की जिम्मेदारी भी तय की।
यह फैसला ई-कॉमर्स कंपनियों और ऑनलाइन विक्रेताओं के लिए एक कड़ा संदेश है। यह दर्शाता है कि डिजिटल युग में भी उपभोक्ताओं की सुरक्षा सर्वोपरि है और तकनीकी खामियों या ‘मध्यस्थ’ होने का बहाना बनाकर कंपनियां अपनी जवाबदेही से बच नहीं सकतीं।
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