साहस और स्वाभिमान: खाड़ी के तनाव के बीच कजाकिस्तान में गूंजा ‘छत्तीसगढ़ महतारी’ का जयघोष

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दुर्ग/भिलाई: दुनिया जहाँ एक ओर ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते वैश्विक तनाव को लेकर आशंकित है, वहीं छत्तीसगढ़ के जांबाज ट्रांसपोर्टरों ने अपनी निडरता का परिचय दिया है। छत्तीसगढ़ सीमेंट ट्रांसपोर्ट वेलफेयर एसोसिएशन (CCTWA) की टीम ने हाल ही में कजाकिस्तान के अल्माटी शहर का ऐतिहासिक दौरा कर एक मिसाल पेश की है।

तिरंगे की आन और छत्तीसगढ़ का मान

​अल्माटी की बर्फीली वादियों और ऊंचे माउंटेन हिल्स पर जब CCTWA के सदस्यों ने भारत का तिरंगा लहराया, तो माहौल देशभक्ति के रंग में डूब गया। ‘भारत माता की जय’ के साथ-साथ ‘छत्तीसगढ़ महतारी की जय’ के नारों ने विदेशी धरती पर छत्तीसगढ़ी संस्कृति और पहचान को गौरवान्वित किया।

रोमांच और पायलटिंग का अनुभव

​इस यात्रा में केवल प्राकृतिक सौंदर्य का आनंद ही नहीं लिया गया, बल्कि सदस्यों ने साहसिक गतिविधियों में भी बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया:

  • स्वयं की पायलटिंग: सदस्यों ने छोटे विमान उड़ाने (पायलटिंग) का अनूठा अनुभव प्राप्त किया।
  • प्रकृति का आनंद: बर्फबारी और पहाड़ों के बीच टीम ने एकता और भाईचारे का संदेश दिया।

बिजनेस कॉन्क्लेव: भविष्य की रणनीति पर मंथन

​यह विदेशी दौरा केवल मनोरंजन तक सीमित नहीं था। पहाड़ों की वादियों में संगठन ने एक महत्वपूर्ण बैठक भी की, जिसमें परिवहन व्यवसाय के भविष्य पर चर्चा हुई:

  1. चुनौतियां: ट्रांसपोर्ट सेक्टर की वर्तमान समस्याओं पर विस्तार से बात की गई।
  2. मजबूत संगठन: CCTWA को भविष्य में और अधिक प्रभावशाली बनाने के लिए नई योजनाओं पर मुहर लगी।
  3. एकजुटता: सर्वसम्मति से कई कड़े और प्रभावी निर्णय लिए गए।

इन्होंने बढ़ाया मान (टीम के सदस्य)

​इस यात्रा में इन्दरजीत सिंह (छोटू), मलकित सिंह, अरुण तुलस्यान, मनोज गुप्ता, सुशील अग्रवाल, बावा सुखमोहन सिंह, सुब्रत डे, सत्य नारायण सिंह, आशीष अग्रवाल, पुरुषोत्तम भिते, मनदीप सिंह झाज, शिव शंकर पाढ़ी, अनिल कुमार चौधरी, बलजीन्दर सिंह और जातिन्दर सिंह शामिल रहे।

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