दुर्ग। छत्तीसगढ़ में अफीम की खेती के लगातार उजागर हो रहे मामलों ने प्रदेश की सियासत में उबाल ला दिया है। दुर्ग जिला कांग्रेस कमेटी की नवनियुक्त महामंत्री निकिता मिलिंद ने राज्य की कानून व्यवस्था पर कड़ा प्रहार करते हुए आरोप लगाया है कि प्रदेश अब नशे के सौदागरों की सुरक्षित शरणस्थली बनता जा रहा है।
तरबूज के खेतों में ‘काला सोना’
निकिता मिलिंद ने जारी प्रेस बयान में कहा कि दुर्ग और बलरामपुर के बाद अब रायगढ़ के तमनार (आमाघाट) में अफीम की खेती का खुलासा होना चौंकाने वाला है। उन्होंने कहा:
”हैरानी की बात यह है कि जिस जमीन पर कागजों में तरबूज और ककड़ी उगाने का दावा किया गया, वहां अफीम की फसल लहलहा रही थी। क्या प्रशासन इतना अंधा हो चुका है कि उसे खेत में लगी इस प्रतिबंधित फसल की भनक तक नहीं लगी?”
प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल
कांग्रेस महामंत्री ने इस पूरे मामले में पुलिस और स्थानीय प्रशासन की भूमिका को संदिग्ध बताते हुए कुछ तीखे सवाल किए हैं:
- रातों-रात की फसल? क्या अफीम की फसल रातों-रात तैयार हो जाती है? इतने महीनों तक स्थानीय तंत्र क्या कर रहा था?
- मिलीभगत का संदेह: यह केवल लापरवाही नहीं, बल्कि गहरे भ्रष्टाचार और ऊंचे रसूखदारों के संरक्षण की ओर इशारा करता है।
- कानून व्यवस्था ध्वस्त: भाजपा सरकार की नाक के नीचे छत्तीसगढ़ धीरे-धीरे ‘नशे का गढ़’ बनता जा रहा है।
उच्चस्तरीय जांच की मांग
निकिता मिलिंद ने चेतावनी दी है कि यदि इस तरह की गतिविधियों पर अंकुश नहीं लगाया गया, तो छत्तीसगढ़ का भविष्य अंधकार में डूब जाएगा। उन्होंने इस पूरे प्रकरण की उच्चस्तरीय जांच की मांग की है ताकि पर्दे के पीछे बैठे असली दोषियों को बेनकाब किया जा सके।