▶ मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणी- व्यावसायिक लाभ के लिए सुरक्षा से समझौता बर्दाश्त नहीं ▶ 5 जनवरी 2012 से पहले पंजीकृत बसों की भी होगी सघन जांच, नियम टूटे तो थमेंगे पहिए
जबलपुर: यात्री सुरक्षा को दरकिनार कर मुनाफा कमाने वाले बस ऑपरेटरों के खिलाफ मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। अदालत ने राज्य की सभी स्टेज कैरिज और टूरिस्ट बसों में प्रवेश (Entry) और निकास (Exit) के लिए अलग-अलग द्वार अनिवार्य कर दिए हैं। इसके साथ ही क्षेत्रीय परिवहन प्राधिकरण (RTA) को 45 दिनों के भीतर इन नियमों का सख्ती से पालन सुनिश्चित करने का अल्टीमेटम दिया गया है।
जस्टिस विवेक जैन की एकल पीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए स्पष्ट किया कि बसों में केवल एक दरवाजा होना यात्रियों की सुरक्षा के साथ एक गंभीर समझौता है। अदालत ने तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा, “यह अत्यंत खेदजनक स्थिति है कि अनेक वातानुकूलित (AC) और लक्जरी बसों में दो दरवाजे नहीं हैं। आग या दुर्घटना की स्थिति में बड़ी संख्या में जान-माल का नुकसान होना सर्वविदित है, फिर भी नियमों का पालन सुनिश्चित नहीं किया गया।”
व्यावसायिक लाभ के लिए नहीं खेल सकते जान से हाईकोर्ट ने एक याचिकाकर्ता की अपील पर सुनवाई करते हुए यह ऐतिहासिक आदेश दिया। दरअसल, याचिकाकर्ता की बस का परमिट राज्य परिवहन अपीलीय अधिकरण द्वारा रद्द कर दिया गया था, जिसे हाईकोर्ट ने सही ठहराया है। अदालत ने पाया कि संबंधित बस नियम 77(1-ए) के तहत निर्धारित मानकों को भी पूरा नहीं कर रही थी, जिसमें न्यूनतम सीट क्षमता 35+2 (ड्राइवर और कंडक्टर सहित) होना अनिवार्य है। बस में केवल एक ही प्रवेश-निकास द्वार था। पीठ ने दो टूक शब्दों में कहा कि व्यावसायिक लाभ के लिए किसी भी सूरत में सुरक्षा से समझौता नहीं किया जा सकता। एक ही दरवाजा दुर्घटना या आग लगने की स्थिति में मृत्यु का कारण बन सकता है।
पुराने वाहनों पर भी गिरेगी गाज संविधान के अनुच्छेद 227 के तहत अपने अधिकारों का प्रयोग करते हुए, अदालत ने निर्देश दिया है कि 5 जनवरी 2012 से पहले पंजीकृत बसों की भी बारूकी से जांच की जाए। मोटर वाहन अधिनियम के प्रावधानों को स्पष्ट करते हुए अदालत ने बताया कि हर बस में बाईं ओर दो दरवाजे (एक प्रवेश और एक निकास के लिए) और एक आपातकालीन (Emergency) दरवाजा होना अनिवार्य है।
45 दिन का समय, फिर होगी कार्रवाई यदि कोई भी बस मध्य प्रदेश मोटर वाहन नियम 1994 के नियम 164 का उल्लंघन करती पाई जाती है, तो उसे 45 दिनों के भीतर नियमों का पालन करना होगा। ऐसा न करने पर संबंधित बस के संचालन पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी जाएगी। अदालत ने राज्य के सभी परिवहन प्राधिकरणों को निर्देश दिया है कि वे नियमों के उल्लंघन की जांच करें और दोषी बसों पर कार्रवाई करें।
इस महत्वपूर्ण मामले की अगली सुनवाई अब 27 अप्रैल 2026 को निर्धारित की गई है। इस फैसले के बाद परिवहन विभाग हरकत में आ गया है और माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में बसों की सघन चेकिंग का अभियान शुरू किया जाएगा।
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