नई दिल्ली/रायपुर।भारत के आंतरिक सुरक्षा इतिहास में आज का दिन बेहद ऐतिहासिक रहा। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने सोमवार, 30 मार्च 2026 को संसद में एक बड़ी घोषणा करते हुए देश को नक्सलवाद से मुक्त घोषित कर दिया है। गृह मंत्री ने बताया कि सरकार द्वारा तय की गई 31 मार्च की डेडलाइन से पहले ही सुरक्षा बलों ने इस दिशा में निर्णायक सफलता हासिल कर ली है।
‘गोली चलाने वालों को चुकानी होगी कीमत’
लोकसभा को संबोधित करते हुए अमित शाह ने कड़ा संदेश दिया कि अब देश में हथियार उठाने वालों के लिए कोई स्थान नहीं है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा, “जो सुरक्षा बलों पर गोली चलाएंगे, उन्हें इसकी भारी कीमत चुकानी होगी।” हालांकि, उन्होंने यह भी जोड़ा कि सरकार संवाद के लिए हमेशा तैयार है, लेकिन हिंसा को किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
बस्तर: गढ़ से मुक्ति तक का सफर*
गृह मंत्री ने अपने भाषण में विशेष रूप से छत्तीसगढ़ के बस्तर का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि जो क्षेत्र कभी ‘रेड कॉरिडोर’ का केंद्र और नक्सलवाद का सबसे मजबूत गढ़ माना जाता था, वह अब इस समस्या से लगभग पूरी तरह मुक्त हो चुका है। एक समय देश के 12 राज्यों और लगभग 70 प्रतिशत भूभाग पर फैला यह संकट अब इतिहास के पन्नों में सिमट गया है।
पिछली सरकारों पर साधा निशाना
अमित शाह ने कांग्रेस और पूर्ववर्ती सरकारों पर हमला बोलते हुए कहा कि दशकों तक शासन करने के बावजूद आदिवासी क्षेत्रों में विकास क्यों नहीं पहुँचा? उन्होंने कहा:
- नक्सलवाद केवल विकास की कमी नहीं, बल्कि एक हिंसक विचारधारा थी।
- 2014 के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में ‘सुरक्षा और विकास’ की दोहरी नीति अपनाई गई।
- प्रभावित क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाएं, सड़कें और शिक्षा पहुँचाकर नक्सलवाद की जड़ों पर प्रहार किया गया।
सुरक्षा बलों को दिया जीत का श्रेय
इस बड़ी उपलब्धि का श्रेय गृह मंत्री ने मैदान पर तैनात जवानों को दिया। उन्होंने विशेष रूप से CAPF (अर्धसैनिक बल), कोबरा बटालियन, छत्तीसगढ़ पुलिस और DRG (डिस्ट्रिक्ट रिजर्व गार्ड) के अदम्य साहस की सराहना की। इस दौरान उन्होंने नक्सल विरोधी अभियान में शहीद हुए जवानों को भावपूर्ण श्रद्धांजलि भी अर्पित की।
विकास के नए युग की शुरुआत
नक्सलवाद की समाप्ति के साथ ही अब इन दुर्गम क्षेत्रों में तेजी से बुनियादी ढांचे का विस्तार होने की उम्मीद है। गृह मंत्री ने भरोसा दिलाया कि अब बस्तर समेत देश के तमाम सुदूर अंचलों में लोकतंत्र की जड़ें और मजबूत होंगी और शासन की योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुँचेगा।