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आईआईटी भिलाई में ‘आधुनिक भारतीय साहित्य और शहरीकरण’ पर पाँच दिवसीय प्रमाणपत्र पाठ्यक्रम संपन्न

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भिलाई | भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) भिलाई के संस्कृति, भाषा और परंपरा अध्ययन केंद्र (CCLT) द्वारा एसोसिएशन फॉर लिटरेरी अर्बन स्टडीज (ALUS) के सहयोग से 16 से 20 फरवरी 2026 तक एक विशेष आवासीय प्रमाणपत्र पाठ्यक्रम का सफल आयोजन किया गया। “Urbanity and Home in Modern Indian Literature” विषय पर आधारित इस पाँच दिवसीय कार्यक्रम ने आधुनिक भारत में ‘घर’ और ‘शहरीकरण’ के अंतर्संबंधों पर गहन चर्चा की।

पाठ्यक्रम का मुख्य उद्देश्य

​इस पाठ्यक्रम का प्राथमिक लक्ष्य शोधार्थियों और विद्यार्थियों को साहित्यिक शहरी अध्ययन (Literary Urban Studies) के क्षेत्र में मजबूत सैद्धांतिक समझ प्रदान करना था। कार्यक्रम के दौरान इस बात पर जोर दिया गया कि कैसे आधुनिक भारतीय साहित्य में “घर” केवल एक भौतिक ढांचा न रहकर भावनाओं, वास्तुकला और बदलती सामाजिक परिस्थितियों का संगम बन गया है।

विशेषज्ञों का वैचारिक मंथन

​देश-विदेश के प्रख्यात विशेषज्ञों ने इस विषय के विभिन्न पहलुओं पर प्रकाश डाला:

  • प्रो. सेसिले सैंडटन (अध्यक्ष, ALUS): उन्होंने साहित्य को एक ‘वैकल्पिक अभिलेख’ (Counter-Archive) के रूप में देखने पर जोर दिया। उन्होंने समझाया कि कैसे शहर के इतिहास को मिटाने की राजनीति के बीच साहित्य लोगों के वास्तविक अनुभवों को संजोकर रखता है।
  • डॉ. अनुभव प्रधान (एसोसिएट हेड, CCLT): आपने औपनिवेशिक काल की हवेलियों से लेकर आधुनिक बहुमंज़िला अपार्टमेंट्स तक, भारतीय आवासीय शैलियों के विकासवादी सफर को रेखांकित किया।
  • डॉ. देबजानी सेनगुप्ता (दिल्ली विश्वविद्यालय): उन्होंने विभाजन के दर्द और उससे “घर” की परिभाषा में आए बदलावों पर बात की। उन्होंने बताया कि कैसे घर अब केवल सुरक्षा का प्रतीक न रहकर स्मृति, क्षति और संघर्ष का स्थल बन गए हैं।
  • प्रो. स्वास्ति स्थापक (NIT रायपुर): उन्होंने स्थानीय संदर्भ में भिलाई स्टील प्लांट टाउनशिप के स्थापत्य इतिहास और इसकी योजनाबद्ध संरचना के विकास पर महत्वपूर्ण व्याख्यान दिया।

क्षेत्र भ्रमण: किताबी ज्ञान का व्यावहारिक अनुभव

​पाठ्यक्रम के एक विशेष हिस्से के रूप में प्रतिभागियों के लिए भिलाई स्टील प्लांट (BSP) टाउनशिप का एक दिवसीय अध्ययन दौरा आयोजित किया गया।

  • प्रत्यक्ष अवलोकन: प्रतिभागियों ने औद्योगिक टाउनशिप की योजना और वास्तुकला को करीब से देखा।
  • सीख: इस दौरे ने छात्रों को भौतिक संरचनाओं और सामुदायिक पहचान के बीच के गहरे संबंध को समझने में मदद की।

​इस गौरवशाली आयोजन में देश के विभिन्न केंद्रीय विश्वविद्यालयों और राष्ट्रीय संस्थानों के शोधार्थियों ने हिस्सा लिया। कार्यक्रम के समापन तक, प्रतिभागियों ने न केवल “घर” की बौद्धिक परंपराओं को समझा, बल्कि व्यक्तिगत निजता, स्वायत्तता और विरासत जैसे गंभीर विषयों पर एक नया दृष्टिकोण विकसित किया।

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