रायपुर: छत्तीसगढ़ विधानसभा के बजट सत्र का आज पांचवां दिन है। आज का दिन संसदीय इतिहास में एक खास संदेश देने वाला साबित होगा, क्योंकि कल तक जो हाथ हथियार थामकर लोकतंत्र का विरोध करते थे, आज वही हाथ सदन की कार्यवाही के साक्षी बनेंगे।
मुख्य बिंदु:
- सदन में ‘लोकतंत्र’ का दीदार: आत्मसमर्पण कर चुके (सरेंडर) नक्सली आज छत्तीसगढ़ विधानसभा की कार्यवाही देखने पहुंचेंगे। यह सरकार की ओर से उन्हें मुख्यधारा से जोड़ने की एक प्रतीकात्मक और प्रभावी कोशिश मानी जा रही है।
- डिप्टी सीएम के साथ डिनर: इस ऐतिहासिक पहल की शुरुआत कल रात ही हो गई थी, जब डिप्टी सीएम विजय शर्मा ने अपने निवास पर 125 सरेंडर नक्सलियों के साथ रात्रिभोज (डिनर) किया।
- संवाद से समाधान की ओर: रात्रिभोज के दौरान डिप्टी सीएम ने इन पूर्व नक्सलियों से लंबी बातचीत की। उन्होंने न केवल उनकी समस्याओं को सुना, बल्कि बस्तर के विकास और शांति को लेकर उनके सुझाव भी लिए।
- पुनर्वास पर जोर: राज्य सरकार नक्सलियों के पुनर्वास (Rehabilitation) को लेकर बेहद गंभीर है। सरकार का मानना है कि केवल बंदूक से नहीं, बल्कि संवाद और सम्मान से ही इस समस्या का स्थाई समाधान संभव है।
बड़ी पहल का बड़ा संदेश
अक्सर नक्सली विचारधारा में लोकतंत्र और चुनाव का बहिष्कार किया जाता है। ऐसे में सरेंडर कर चुके नक्सलियों का देश के सबसे बड़े लोकतांत्रिक मंदिर (विधानसभा) में प्रवेश करना, शासन व्यवस्था के प्रति उनके विश्वास को मजबूत करेगा।
”यह महज एक दौरा नहीं, बल्कि मुख्यधारा में लौटने का एक उत्सव है। जब ये लोग सदन की कार्यवाही देखेंगे, तो उन्हें समझ आएगा कि जनता की समस्याओं का समाधान चर्चा और कानून से कैसे होता है।”