अक्सर नक्सली विचारधारा में लोकतंत्र और चुनाव का बहिष्कार किया जाता है। ऐसे में सरेंडर कर चुके नक्सलियों का देश के सबसे बड़े लोकतांत्रिक मंदिर (विधानसभा) में प्रवेश करना, शासन व्यवस्था के प्रति उनके विश्वास को मजबूत करेगा।
”यह महज एक दौरा नहीं, बल्कि मुख्यधारा में लौटने का एक उत्सव है। जब ये लोग सदन की कार्यवाही देखेंगे, तो उन्हें समझ आएगा कि जनता की समस्याओं का समाधान चर्चा और कानून से कैसे होता है।”
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