कौड़ियों के दाम बिका सरकारी ‘रत्न’ FSNL, भिलाई में आर-पार की जंग का ऐलान!

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भिलाई / के मुर्गा चौक स्थित फेरो स्क्रैप निगम लिमिटेड (FSNL) को निजीकरण से बचाने के लिए अब ‘आर-पार’ की लड़ाई शुरू हो गई है। FSNL बचाओ संघर्ष समिति ने केंद्र सरकार और बीएसपी प्रबंधन के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए 30 मार्च को एक भव्य आंदोलन का शंखनाद कर दिया है। समिति का आरोप है कि 1000 करोड़ की इस कंपनी को महज एक तिहाई कीमत पर जापानी कंपनी के हाथों ‘बेच’ दिया गया है।
समिति के संयोजक मंडल सदस्य गजेंद्र सिंह, राजू लाल श्रेष्ठ और अरुण सिंह सिसोदिया ने संयुक्त पत्रकार वार्ता में गंभीर खुलासे किए हैं। उनका सीधा आरोप है कि केंद्र सरकार ने एक सोची-समझी साजिश के तहत, 1000 करोड़ रुपये से अधिक मूल्य वाली इस मिनी रत्न कंपनी को मात्र 320 करोड़ रुपये में जापानी कंपनी ‘कोनीडके’ के हवाले कर दिया है।
​इतना ही नहीं, इस पूरे खेल में भिलाई इस्पात संयंत्र (BSP) के कुछ आला अधिकारियों और स्क्रैप माफियाओं की मिलीभगत का भी आरोप लगा है। बताया जा रहा है कि 750 करोड़ रुपये के बड़े टेंडर को जानबूझकर चार छोटे हिस्सों में बांट दिया गया, ताकि ब्लैक लिस्टेड और गुमनाम ठेकेदारों को फायदा पहुंचाया जा सके और खुद FSNL को ही इस प्रक्रिया से बाहर का रास्ता दिखा दिया जाए।

पिछले 40 वर्षों से इस्पात मंत्रालय को हजारों करोड़ का मुनाफा कमा कर देने वाली FSNL के भविष्य पर अब ताला लटकता दिख रहा है।
कारखाना अधिनियम 1948 के तहत BSP मुख्य नियोक्ता है, लेकिन वर्तमान टेंडरों में श्रमिकों की सुरक्षा का कोई जिक्र नहीं है।
नियमों

समिति का कहना है कि यह ‘ठेका श्रम अधिनियम 1970’ का खुला उल्लंघन है।
सैकड़ों नियमित और ठेका श्रमिकों की नौकरी और उनकी सेवा शर्तें अब अधर में हैं

“यह सीधे तौर पर भ्रष्टाचार और श्रमिकों के पेट पर लात मारने की साजिश है। हम चुप नहीं बैठेंगे, 30 मार्च को होने वाला आंदोलन सरकार और प्रबंधन को यह बताने के लिए काफी होगा कि श्रमिक एकजुट हैं।”

अब देखना यह होगा कि 30 मार्च के इस बड़े आंदोलन के बाद क्या केंद्र सरकार अपने फैसले पर पुनर्विचार करती है या भिलाई की यह ऐतिहासिक इकाई निजी हाथों की भेंट चढ़ जाएगी।

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