नक्सल मोर्चे पर ऐतिहासिक कामयाबी: तेलंगाना में 130 नक्सलियों ने किया आत्मसमर्पण

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हैदराबाद/बस्तर: नक्सलवाद के खिलाफ जारी अभियान में सुरक्षा बलों को अब तक की सबसे बड़ी सफलताओं में से एक मिली है। तेलंगाना में 130 सक्रिय नक्सलियों ने एक साथ हथियार डालकर मुख्यधारा में शामिल होने का फैसला किया है।

सीएम रेवंत रेड्डी के समक्ष डाले हथियार

​इन सभी नक्सलियों ने तेलंगाना के मुख्यमंत्री अनुमूला रेवंत रेड्डी के समक्ष आत्मसमर्पण किया। इस दौरान नक्सलियों ने अपने 124 अत्याधुनिक हथियार भी पुलिस को सौंपे। मुख्यमंत्री ने आत्मसमर्पण करने वालों का स्वागत करते हुए उन्हें बेहतर भविष्य और सरकारी योजनाओं का लाभ देने का आश्वासन दिया।

खबर के मुख्य बिंदु:

  • सबसे बड़ी सफलता: इसे हाल के वर्षों में नक्सल मोर्चे पर सबसे बड़ी सामूहिक उपलब्धि माना जा रहा है।
  • देवजी की टीम का प्रभाव: सरेंडर करने वालों में खूंखार नक्सली कमांडर देवजी की टीम के कई महत्वपूर्ण सदस्य शामिल हैं। गौरतलब है कि कुछ दिनों पहले स्वयं देवजी ने भी आत्मसमर्पण किया था, जिसके बाद से संगठन में बिखराव देखा जा रहा था।
  • बटालियन के सदस्य शामिल: आत्मसमर्पण करने वालों में नक्सली संगठन के घातक ‘बटालियन’ के कई ट्रेंड सदस्य और कैडर शामिल हैं।
  • भारी मात्रा में हथियार बरामद: नक्सलियों ने सरेंडर के दौरान 124 हथियार जमा किए हैं, जो उनकी सैन्य क्षमता को बड़ा झटका है।

बस्तर और सीमावर्ती इलाकों पर असर

​चूंकि बस्तर (छत्तीसगढ़) और तेलंगाना की सीमाएं आपस में जुड़ी हुई हैं, इसलिए इतनी बड़ी संख्या में नक्सलियों के टूटने का सीधा असर बस्तर के नक्सल नेटवर्क पर भी पड़ेगा। सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि देवजी जैसे बड़े नेताओं के सरेंडर के बाद अब जमीनी स्तर के लड़ाकों का विश्वास संगठन से पूरी तरह डगमगा गया है।

“हिंसा का रास्ता छोड़कर मुख्यधारा में आना ही विकास का एकमात्र विकल्प है। हम आत्मसमर्पण करने वाले युवाओं के पुनर्वास के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं।”

मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO), तेलंगाना

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