रायपुर: जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ (जे) के प्रदेश अध्यक्ष अमित जोगी की मुश्किलें एक बार फिर बढ़ती हुई नजर आ रही हैं। बहुचर्चित जग्गी हत्याकांड मामले में अमित जोगी को मंगलवार को निचली अदालत से फौरी राहत तो मिल गई है, लेकिन उनका भविष्य अब पूरी तरह से हाईकोर्ट के फैसले पर निर्भर है।
निचली अदालत से मिली जमानत
जग्गी हत्याकांड से जुड़े मामले में अमित जोगी ने रायपुर की निचली अदालत का दरवाजा खटखटाया था। उन्होंने न्यायाधीश पंकज कुमार सिन्हा की अदालत में अपनी जमानत याचिका प्रस्तुत की। अदालत ने इस मामले की सुनवाई करते हुए उन्हें 50-50 हजार रुपए के बॉन्ड और जमानत के पट्टे पेश करने की शर्त पर जमानत दे दी है। इस कदम से उन्हें गिरफ्तारी से फौरी तौर पर तो राहत मिल गई है, लेकिन कानूनी संकट अभी टला नहीं है।
बुधवार को हाईकोर्ट में अहम सुनवाई
इस पूरे प्रकरण में सबसे अहम दिन बुधवार का होने वाला है। जग्गी हत्याकांड मामले में बिलासपुर हाईकोर्ट में अंतिम सुनवाई रखी गई है। इस सुनवाई पर प्रदेश भर के राजनीतिक गलियारों और आम जनता की निगाहें टिकी हुई हैं, क्योंकि इसी फैसले से यह तय होगा कि अमित जोगी को राहत मिलेगी या उनकी मुश्किलें और बढ़ेंगी।
जेल जाने की भी लटक रही है तलवार
कानूनी जानकारों के अनुसार, बुधवार को होने वाली हाईकोर्ट की सुनवाई अमित जोगी के राजनीतिक और व्यक्तिगत भविष्य के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। यदि हाईकोर्ट की ओर से आए फैसले में उन्हें इस हत्याकांड के मामले में दोषी या आरोपी करार दिया जाता है, तो अमित जोगी को जेल भी जाना पड़ सकता है। फिलहाल, जोगी खेमे को हाईकोर्ट से न्याय की उम्मीद है, लेकिन अंतिम फैसला आने तक संशय की स्थिति बनी हुई है।
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