दुर्ग/भिलाई

दुर्ग में न्याय का नया कीर्तिमान: राष्ट्रीय लोक अदालत में 10 लाख से अधिक मामलों का ऐतिहासिक निराकरण

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दुर्ग, 14 मार्च 2026: ‘सुलह से न्याय’ के संकल्प के साथ आज दुर्ग जिला न्यायालय में आयोजित राष्ट्रीय लोक अदालत ने सफलता के सारे पुराने रिकॉर्ड ध्वस्त कर दिए। छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय के माननीय मुख्य न्यायाधीश श्री रमेश सिन्हा की गरिमामयी उपस्थिति में आयोजित इस लोक अदालत में कुल 10,13,730 प्रकरणों का आपसी समझौते से निराकरण किया गया।

मुख्य आकर्षण और उपलब्धियां

  • ऐतिहासिक आंकड़ा: कुल 10,13,826 मामलों में से 10,13,730 का निपटारा हुआ।
  • करोड़ों की राहत: पक्षकारों के पक्ष में कुल 49,60,31,667 रुपये की अवार्ड राशि पारित की गई।
  • सांस्कृतिक नवाचार: विधिक जागरूकता फैलाने के लिए मुख्य न्यायाधीश द्वारा ‘पंडवानी गीत’ का विमोचन किया गया और बार सदस्यों द्वारा नुक्कड़ नाटक की प्रस्तुति दी गई।
  • विशेष उपस्थिति: पोर्टफोलियो जज माननीय न्यायमूर्ति श्री नरेश कुमार चंद्रवंशी की सक्रिय सहभागिता रही।

त्वरित न्याय और सामाजिक सद्भाव

​मुख्य न्यायाधीश श्री रमेश सिन्हा ने अपने संबोधन में कहा कि लोक अदालत केवल फाइलों का बोझ कम करने का जरिया नहीं, बल्कि समाज में सद्भाव स्थापित करने का मंच है। आयोजन की कुछ खास कड़ियाँ इस प्रकार रहीं:

  1. घर बैठे न्याय: मोबाइल अवेयरनेस वैन के जरिए बुजुर्गों और बीमार पक्षकारों को उनके घर पर ही न्याय प्रक्रिया से जोड़ा गया।
  2. डिजिटल पहुँच: फिजिकल उपस्थिति के साथ-साथ वर्चुअल मोड (वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग) का प्रभावी उपयोग किया गया।
  3. टूटते परिवार जुड़े: परिवार न्यायालय में काउंसलिंग के माध्यम से कई बिछड़े हुए जोड़ों ने फिर से साथ रहने का फैसला किया।
  4. सीखने का अवसर: विधि महाविद्यालयों के छात्रों ने लोक अदालत की कार्यवाही का प्रत्यक्ष अवलोकन कर वैकल्पिक विवाद समाधान (ADR) की बारीकियों को समझा।

व्यवस्था और सेवा भाव

​न्यायालय परिसर का माहौल आज उत्सव जैसा रहा। जहाँ एक ओर NCC कैडेट्स ने मुख्य न्यायाधीश की भव्य अगवानी की, वहीं दूसरी ओर सामाजिक संस्थाओं द्वारा आमजन के लिए निःशुल्क लंगर की व्यवस्था की गई। साथ ही, केंद्रीय जेल दुर्ग के बंदियों द्वारा निर्मित उत्पादों की प्रदर्शनी और निःशुल्क स्वास्थ्य शिविर ने इस आयोजन में मानवीय संवेदनाओं का रंग भर दिया।

“आज का यह आयोजन सिद्ध करता है कि जब न्यायिक तंत्र, अधिवक्ता और समाज एक साथ मिलते हैं, तो न्याय न केवल त्वरित होता है बल्कि सर्वसुलभ भी हो जाता है।”

माननीय मुख्य न्यायाधीश श्री रमेश सिन्

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