रायपुर/ छत्तीसगढ़ राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने शिक्षा के अधिकार (RTE) के तहत एक बड़ा फैसला सुनाते हुए निजी स्कूलों और शिक्षा विभाग की लापरवाही पर कड़ा प्रहार किया है। आयोग की सख्ती के कारण न केवल बंद हो चुका RTE पोर्टल दोबारा खुला, बल्कि एक गरीब पालक को 10 माह बाद उसके बच्चे की पूरी फीस भी वापस मिली।
एक जरूरतमंद पालक ने अपने बच्चे के भविष्य के लिए शहर के एक प्रतिष्ठित स्कूल में अनिवार्य एवं निःशुल्क शिक्षा का अधिकार अधिनियम (RTE) के तहत आवेदन किया था। अप्रैल में हुई प्रथम चरण की लॉटरी में बच्चे का चयन भी हो गया, लेकिन स्कूल प्रबंधन और नोडल अधिकारी की उदासीनता के कारण उसे प्रवेश नहीं मिल सका।
लगभग 10 माह बाद जब यह मामला बाल अधिकार संरक्षण आयोग के पास पहुँचा, तो अध्यक्ष डॉ. वर्णिका शर्मा ने इस पर त्वरित संज्ञान लिया। आयोग ने सुनवाई के दौरान पाया कि प्रक्रियागत खामियों की सजा बच्चे को नहीं दी जा सकती।
आयोग के प्रमुख निर्देश:
रायपुर/दुर्ग: छत्तीसगढ़ भाजपा ने कड़ा रुख अपनाते हुए दुर्ग के कद्दावर नेता विनायक ताम्रकर को…
दुर्ग। जिले में नशे के सौदागरों के खिलाफ दुर्ग पुलिस ने अब तक की सबसे…
भिलाई: होली के पावन अवसर पर सर्व समाज कल्याण समिति के सदस्यों ने सौजन्य मुलाकात…
सिमगा/छत्तीसगढ़: छत्तीसगढ़ के सिमगा क्षेत्र के ग्राम दरचुरा के पास आज सुबह एक दर्दनाक…
जशपुर : जशपुर जिले के दुलदुला थाना क्षेत्र से एक भीषण सड़क हादसे की खबर…
भिलाई /छत्तीसगढ़ सरकार के बजट 2026-27 ने भिलाईवासियों, विशेषकर वैशाली नगर विधानसभा क्षेत्र के निवासियों…