महासमुंद की महिलाओं ने सीखे बकरी पालन के गुर: कामधेनु विश्वविद्यालय में तीन दिवसीय प्रशिक्षण संपन्न

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अंजोरा (दुर्ग) | ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती देने और महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से दाऊ श्री वासुदेव चंद्राकर कामधेनु विश्वविद्यालय, दुर्ग में आयोजित तीन दिवसीय विशेष प्रशिक्षण शिविर का सफलतापूर्वक समापन हुआ। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (NRLM) के अंतर्गत आयोजित इस कार्यक्रम में महासमुंद जिले की 33 महिलाओं एवं उद्यमियों ने “बकरी पालन प्रबंधन एवं उद्यमिता विकास” विषय पर गहन प्रशिक्षण प्राप्त किया।

वैज्ञानिक पद्धति से बढ़ेगी आय

​17 से 19 मार्च 2026 तक चले इस प्रशिक्षण का आयोजन विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. आर.आर.बी. सिंह के मार्गदर्शन एवं अधिष्ठाता डॉ. सुशांत पाल व निदेशक विस्तार शिक्षा डॉ. मनोज गेंदले के नेतृत्व में किया गया। समापन समारोह के मुख्य अतिथि डॉ. आर.आर.बी. सिंह ने कहा:

​”पशुपालन ग्रामीण अर्थव्यवस्था का आधार है। वैज्ञानिक पद्धति से बकरी पालन कर छोटे और भूमिहीन किसान भी अपनी आर्थिक स्थिति सुधार सकते हैं। शिक्षित बेरोजगार युवाओं के लिए यह ग्राम स्तर पर रोजगार सृजन का बेहतरीन जरिया है।”

प्रशिक्षण के मुख्य आकर्षण

​प्रशिक्षण के दौरान विशेषज्ञों ने पशुपालकों को बकरी पालन के हर पहलू से रूबरू कराया, जिसमें प्रमुख रूप से शामिल थे:

  • नस्ल चयन: छत्तीसगढ़ की जलवायु के अनुकूल नस्लें और नस्ल सुधार की तकनीक।
  • प्रबंधन: आवास व्यवस्था, चारा प्रबंधन और पोषण।
  • स्वास्थ्य: परजीवी जनित रोगों की पहचान और उनका समय पर टीकाकरण/रोकथाम।
  • उद्यमिता: मांस उत्पादन तकनीक, वैल्यू एडिशन और बैंक लोन की प्रक्रिया।
  • क्षेत्र भ्रमण: प्रशिक्षणार्थियों ने उस्मानाबादी फार्म, अंजोरि बकरी फार्म, डेयरी, पोल्ट्री और चारा उत्पादन इकाई का प्रत्यक्ष अवलोकन किया।

सशक्त होती ग्रामीण महिलाएं

​आयोजक डॉ. रामचंद्र रामटेके ने बताया कि बकरी पालन अब केवल जीविकोपार्जन का साधन नहीं, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में ‘उद्यमिता’ का रूप ले रहा है। वहीं, अधिष्ठाता डॉ. सुशांत पाल ने जोर दिया कि बाजार में बकरी के दूध और मांस की बढ़ती मांग के कारण कम लागत में यह व्यवसाय अधिक मुनाफा देने वाला साबित हो रहा है।

प्रशासनिक एवं वित्तीय सहयोग

​इस कार्यक्रम की सफलता में महासमुंद जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री हेमंत नंदनवार (IAS) एवं प्रोग्राम अधिकारी का विशेष योगदान रहा, जिन्होंने NRLM योजना के माध्यम से वित्तीय सहायता सुनिश्चित की।

इनकी रही गरिमामयी उपस्थिति:

कार्यक्रम के समापन पर निदेशक प्रक्षेत्र डॉ. धीरेन्द्र भोंसले, विश्वविद्यालय जनसंपर्क अधिकारी डॉ. दिलीप चौधरी, डॉ. ओ.पी. दीनानी, डॉ. दीप्ति किरण, डॉ. शिवेश देशमुख और डॉ. शब्बीर अनंत सहित कई प्राध्यापक उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन डॉ. भारती साहू ने किया और अंत में सभी प्रशिक्षणार्थियों को प्रमाण पत्र वितरित किए गए।

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