
नाम भले ही मजाकिया लगे, लेकिन मकसद है देश से नफरत और गरीबी मिटाना; पूर्व जस्टिस काटजू ने लोगों से की जुड़ने की अपील
नई दिल्ली। सोशल मीडिया पर इन दिनों राजनीतिक दलों और तरह-तरह के ट्रेंड्स के बीच एक नई और दिलचस्प ‘पार्टी’ चर्चा का विषय बनी हुई है। इंटरनेट पर ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ के वायरल होने के बाद अब ‘इश्क करो पार्टी’ (IKP) का नाम तेजी से ट्रेंड कर रहा है। दिलचस्प बात यह है कि इस अनोखी पहल की शुरुआत सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज जस्टिस मार्कंडेय काटजू ने की है। इस नाम को लेकर सोशल मीडिया पर बड़ी संख्या में मीम्स, पोस्ट और चर्चाओं का बाजार गर्म है।
महज मजाक नहीं, एक गंभीर कोशिश
क्या यह कोई वेलेंटाइन डे जैसा कॉन्सेप्ट है? इस पर स्थिति साफ करते हुए जस्टिस मार्कंडेय काटजू ने अपने ‘एक्स’ (पूर्व में ट्विटर) हैंडल पर एक विस्तृत पोस्ट किया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि कुछ लोगों को नई बनी IKP पार्टी महज़ एक मज़ाक या रोमांस को बढ़ावा देने वाला मंच लग सकती है, लेकिन यह पूरी तरह से गलतफहमी है। उन्होंने कहा, “असल में, यह भारत की बड़ी-बड़ी समस्याओं से निपटने की एक बहुत गंभीर कोशिश है।”
देश की इन ज्वलंत समस्याओं पर है फोकस
पूर्व जस्टिस ने देश की वर्तमान स्थिति पर गहरी चिंता जताते हुए कहा कि आज भारत कई गंभीर चुनौतियों का सामना कर रहा है, जिनमें शामिल हैं:
* भारी गरीबी और भयंकर बेरोजगारी।
* बच्चों में कुपोषण का खतरनाक स्तर (ग्लोबल हंगर इंडेक्स का हवाला देते हुए)।
* आम लोगों के लिए उचित स्वास्थ्य सेवा और अच्छी शिक्षा का अभाव।
* ज़रूरी चीज़ों की आसमान छूती कीमतें।
* जाति और समुदाय के आधार पर फैलाई जा रही नफरत।
उन्होंने राजनेताओं पर निशाना साधते हुए कहा कि स्वार्थी नेता सिर्फ सत्ता और पैसे के लिए काम करते हैं। वे अपने वोट बैंक के लिए जनता को जाति, समुदाय और नस्ल के आधार पर बांट रहे हैं।
’इश्क’ के जरिए एकता का संदेश
जस्टिस काटजू के अनुसार, जब तक देशवासियों में एकता नहीं होगी, इन बड़ी समस्याओं को हल नहीं किया जा सकता। IKP (इश्क करो पार्टी) का मुख्य उद्देश्य इसी बुराई से लड़ना और लोगों में एकता को बढ़ावा देना है। उन्होंने अपील की है कि हमें जाति, धर्म और नस्ल से ऊपर उठकर सभी के लिए ‘इश्क’ (प्रेम और सौहार्द) की भावना रखनी होगी। तभी एक सशक्त जन-संघर्ष छेड़ा जा सकता है। जो लोग इस मुहिम का हिस्सा बनना चाहते हैं, वे ishqkaroparty@gmail.com पर संपर्क कर सकते हैं।
मनोरंजन और व्यंग्य का नया सोशल मीडिया ट्रेंड
बता दें कि ‘इश्क करो पार्टी’ फिलहाल चुनाव आयोग में पंजीकृत कोई राजनीतिक दल नहीं है, बल्कि यह एक सोशल मीडिया अभियान और रचनात्मक ट्रेंड के रूप में उभरी है। नेटीजन्स इसे तनाव, नफरत और पारंपरिक राजनीतिक बहसों से दूर एक सकारात्मक और व्यंग्यात्मक पहल के रूप में देख रहे हैं। बड़ी संख्या में युवा इस ट्रेंड से जुड़कर प्रेम और दोस्ती को बढ़ावा देने की अपील कर रहे हैं।