बिलासपुर | छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित राम अवतार जग्गी हत्याकांड में करीब दो दशकों बाद न्याय की नई पटकथा लिखी गई है। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने पूर्व मुख्यमंत्री दिवंगत अजीत जोगी के पुत्र और जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ (जे) के अध्यक्ष अमित जोगी को दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई है।
सीबीआई की अपील पर आया ऐतिहासिक फैसला
चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस अरविंद कुमार वर्मा की खंडपीठ ने सीबीआई द्वारा दाखिल अपील (ACQA No. 66/2026) पर सुनवाई करते हुए यह अहम फैसला सुनाया। कोर्ट ने निचली अदालत (ट्रायल कोर्ट) के उस फैसले को पूरी तरह पलट दिया, जिसमें अमित जोगी को बरी कर दिया गया था।
इन धाराओं के तहत हुई सजा
हाईकोर्ट ने अमित जोगी को निम्नलिखित धाराओं के तहत दोषी पाया है:
- धारा 302 (हत्या) के साथ धारा 120-बी (आपराधिक षड्यंत्र)।
- सजा: आजीवन कारावास और 1,000 रुपये का अर्थदंड।
- डिफॉल्ट क्लॉज: जुर्माना न भरने पर 6 माह का अतिरिक्त सश्रम कारावास।
कोर्ट की तल्ख टिप्पणी: > फैसला सुनाते हुए खंडपीठ ने स्पष्ट कहा कि, “एक ही गवाही और साक्ष्यों के आधार पर कुछ आरोपियों को दोषी ठहराना और मुख्य साजिशकर्ता को बरी कर देना कानूनी रूप से असंगत और गलत है।”
क्या था मामला?
4 जून 2003 को रायपुर में राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) के नेता राम अवतार जग्गी की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। इस मामले में 31 मई 2007 को रायपुर की विशेष अदालत ने चिमन सिंह, याह्या ढेबर, अभय गोयल और फिरोज सिद्दीकी समेत 28 आरोपियों को तो सजा सुनाई थी, लेकिन अमित जोगी को साक्ष्यों के अभाव में बरी कर दिया था।
सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर हुई दोबारा सुनवाई
बरी किए जाने के खिलाफ सीबीआई और मृतक के पुत्र सतीश जग्गी ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। मामला लंबे समय तक लंबित रहा, जिसके बाद सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर मामले को री-ओपन किया गया। हाईकोर्ट के इस ताज़ा फैसले ने प्रदेश की राजनीति में हड़कंप मचा दिया है।