प्रदेश में 2000 फर्जी CBSE स्कूलों और 1784 स्कूलों में महंगी किताबों की जबरन बिक्री का खुलासा; हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर
रायपुर: राजधानी रायपुर सहित पूरे प्रदेश में निजी स्कूलों की मनमानी फीस और महंगी किताबों की जबरन बिक्री पर स्कूल शिक्षा विभाग ने सख्त रुख अपना लिया है। शिक्षा विभाग ने सभी संभागों को कड़े निर्देश जारी करते हुए निजी स्कूलों से पिछले तीन साल की फीस की विस्तृत रिपोर्ट तलब की है। नियमों की अनदेखी और अभिभावकों से आर्थिक लूट करने वाले स्कूल संचालकों के खिलाफ अब सीधे FIR दर्ज की जाएगी।
फर्जी CBSE पैटर्न और महंगी किताबों पर रोक
राज्य में शिक्षा के नाम पर चल रहे एक बड़े खेल का खुलासा हुआ है। आरोप है कि प्रदेश में करीब 2000 निजी स्कूल फर्जी तरीके से ‘CBSE पैटर्न’ के नाम पर संचालित हो रहे हैं और अभिभावकों को गुमराह कर रहे हैं। इसके साथ ही 1784 स्कूलों में महंगी और बाहरी किताबें जबरन बेचे जाने का मामला भी सामने आया है।
इस पर नकेल कसते हुए शिक्षा विभाग ने स्पष्ट कर दिया है कि राज्य के स्कूलों में केवल SCERT (राज्य शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद) की किताबें ही अनिवार्य होंगी। बाहरी या निजी प्रकाशकों की किताबों को पाठ्यक्रम में शामिल करने पर पूर्णत: रोक लगा दी गई है। फर्जी CBSE पैटर्न का दावा करने वाले स्कूलों को भी चिन्हित कर उन पर कड़ी दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।
हाईकोर्ट पहुंचा मामला, शिक्षा सचिव से मांगा गया शपथ-पत्र
निजी स्कूलों की इस भारी अनियमितता और शिक्षा विभाग के कुछ अधिकारियों की कथित मिलीभगत का मामला अब बिलासपुर हाईकोर्ट पहुंच गया है। इस पूरे प्रकरण को लेकर न्यायालय में एक जनहित याचिका (PIL) दाखिल की गई है। मामले की गंभीरता को देखते हुए हाईकोर्ट ने स्कूल शिक्षा सचिव से शपथ-पत्र मांगा है। याचिकाकर्ताओं ने मांग की है कि मामले में संलिप्त दोषी अधिकारियों और मनमानी करने वाले स्कूल संचालकों के खिलाफ सख्त से सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए।
खबर के मुख्य बिंदु एक नज़र में:
- सख्त निर्देश: शिक्षा विभाग ने सभी संभागों को जारी किए निर्देश, 3 साल की फीस का ब्यौरा मांगा।
- किताबों पर फैसला: केवल SCERT की किताबें होंगी अनिवार्य, निजी प्रकाशकों की महंगी किताबों पर पूर्ण प्रतिबंध।
- फर्जीवाड़ा: प्रदेश में 2000 फर्जी CBSE स्कूल और 1784 स्कूलों में महंगी किताबों की जबरन बिक्री का आरोप।
- कार्रवाई: नियम तोड़ने और आदेशों की अवहेलना करने वाले स्कूलों पर सीधे दर्ज होगी FIR।
- न्यायिक दखल: हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर, शिक्षा सचिव से मांगा गया शपथ-पत्र।