वैदिक चेतना महोत्सव में गूंजे वैदिक जीवन के संदेश, सेवा और सदाचार को बताया जीवन का आधार

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वैदिक चेतना महोत्सव में गूंजे वैदिक जीवन के संदेश, सेवा और सदाचार को बताया जीवन का आधार

रायपुर। वैदिक चेतना महोत्सव के अंतर्गत आयोजित भव्य आध्यात्मिक सभा में अंतरराष्ट्रीय वेद कथाकार आचार्य चंद्रशेखर शास्त्री एवं आचार्य डॉ. अजय आर्य ने वैदिक जीवन-दर्शन, धर्म, सेवा, सदाचार और मानवीय मूल्यों पर आधारित प्रेरक उद्बोधन देकर श्रद्धालुओं को वैदिक संस्कृति के मूल सिद्धांतों से अवगत कराया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लेकर आध्यात्मिक मार्गदर्शन प्राप्त किया।


सभा में छत्तीसगढ़ में वैदिक विचारधारा, यज्ञ और समाजसेवा के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाले विभिन्न व्यक्तित्वों का सम्मान भी किया गया। इसी क्रम में ग्लैम छत्तीसगढ़ की हेमा सक्सेना को उनके सामाजिक एवं सेवा कार्यों के लिए ‘सेवा गौरव सम्मान’ से सम्मानित किया गया।

अपने संबोधन में आचार्य चंद्रशेखर शास्त्री ने कहा कि आधुनिक जीवन में धैर्य, संयम और आध्यात्मिकता का निरंतर क्षय हो रहा है। उन्होंने कहा कि धर्म का एक प्रमुख लक्षण धैर्य है और जीवन में सफलता के लिए सहनशीलता एवं विवेक का होना आवश्यक है। उन्होंने स्वामी दयानंद सरस्वती के योगदान का उल्लेख करते हुए समाज से वेदों की ओर लौटने तथा अंधविश्वासों से ऊपर उठकर सत्य और तर्क आधारित जीवन अपनाने का आह्वान किया।

आचार्य शास्त्री ने आधुनिक समाज में बढ़ती नैतिक चुनौतियों पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि बच्चों के जीवन में संस्कार, सत्संग और पारिवारिक संवाद का अभाव गंभीर सामाजिक संकट को जन्म दे रहा है। उन्होंने कहा कि भाग्यशाली वही है जिसे भोजन के साथ भूख, बिस्तर के साथ नींद और धन के साथ धर्म प्राप्त हो। उन्होंने श्रद्धालुओं से जीवन में भक्ति, सेवा और मधुर व्यवहार को अपनाने का आग्रह किया।

वहीं आचार्य डॉ. अजय आर्य ने अपने उद्बोधन में मधुर वाणी, धर्मयुक्त धन और सदुपयोगी जीवनशैली के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि मनुष्य जीवन अत्यंत दुर्लभ है और इसे सार्थक बनाने का सबसे सरल मार्ग है—मीठा बोलना और सद्भाव के साथ जीवन जीना। ऋग्वेद के मंत्रों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि वैदिक संस्कृति समाज में प्रेम, सकारात्मकता और सौहार्द का संदेश देती है।


धन के महत्व और उसके सदुपयोग पर चर्चा करते हुए आचार्य डॉ. अजय आर्य ने कहा कि केवल धन संग्रह करना जीवन का उद्देश्य नहीं होना चाहिए। धर्मपूर्वक अर्जित धन का उपयोग समाजहित, सेवा और कल्याण के कार्यों में होना चाहिए। उन्होंने कहा कि धन का उपयोग कीजिए, धन को अपना उपयोग मत करने दीजिए। उन्होंने गुरु नानक देव से जुड़ा प्रेरक प्रसंग सुनाकर बताया कि मनुष्य अपने साथ कुछ भी लेकर नहीं जाता, इसलिए जीवन को सेवा, परोपकार और धर्म के मार्ग पर लगाना ही वास्तविक सफलता है।

कार्यक्रम में वैदिक मूल्यों, यज्ञ, समाजोत्थान और सेवा कार्यों में योगदान देने वाले राजेंद्र कुमार अग्रवाल, अजय साहू, प्रताप पोपटानी, मंजू आश्पल्या, मधु बहादुर सिंह, रवि डडसेना और शिशिर हलधर सहित अनेक लोगों को सम्मानित किया गया।
समापन अवसर पर शिव अग्रवाल ने सभी अतिथियों, विद्वानों, आयोजकों एवं श्रद्धालुओं का आभार व्यक्त करते हुए वैदिक चेतना के संदेश को जन-जन तक पहुंचाने का संकल्प दोहराया। उन्होंने कहा कि यह महोत्सव केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि समाज में संस्कार, मधुरता, सेवा और वैदिक मूल्यों के प्रसार का सशक्त अभियान है।


कार्यक्रम में महेश वर्मा, मालती वर्मा, नवीन वर्मा, सोमी वर्मा, नरेश वर्मा धुरंधर, कल्याणी वर्मा, प्रज्ञा, प्राची, मैकू वर्मा, लेकेश्वर विश्वकर्मा, पतिराम साहू, लक्ष्मण प्रसाद साहू, राजेंद्र अग्रवाल, राकेश दुबे, कृष्ण कुमार अग्रवाल, मधु त्रेहन, शैलेंद्र गिरी, डी.एन. शुक्ला, टकेश्वर साहू, हेमा सक्सेना, ऋचा सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।

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