
रायपुर। राजधानी रायपुर में सड़क निर्माण की गुणवत्ता को लेकर एक बार फिर लोक निर्माण विभाग (PWD) सवालों के घेरे में आ गया है। रायपुर एक्सप्रेस-वे पर बनाई गई सड़क निर्माण के महज 24 घंटे के भीतर ही उखड़ने लगी, जिससे विभागीय कार्यप्रणाली और निर्माण गुणवत्ता पर गंभीर प्रश्नचिह्न लग गए हैं।
जानकारी के अनुसार एक्सप्रेस-वे पर बीते दिन शाम को डामरीकरण का कार्य किया गया था, लेकिन अगले ही दिन सड़क की सतह कई स्थानों पर क्षतिग्रस्त दिखाई दी। कहीं डामर गायब हो गया, कहीं बजरी बाहर निकल आई तो कई जगहों पर दरारें नजर आने लगीं। यह वही मार्ग है जहां से प्रतिदिन मुख्यमंत्री, मंत्री, वरिष्ठ अधिकारी और जनप्रतिनिधियों का आवागमन होता है।
प्रदेश सरकार द्वारा लगातार गुणवत्तापूर्ण निर्माण और परफॉर्मेंस गारंटी आधारित कार्यों पर जोर दिया जा रहा है। इसके बावजूद सड़क का इतनी जल्दी खराब हो जाना निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर सवाल खड़े कर रहा है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि निर्माण कार्य में मानकों की अनदेखी की गई और गुणवत्ता से समझौता किया गया, जिसका परिणाम कुछ ही घंटों में सामने आ गया।
मामला सामने आने के बाद पीडब्ल्यूडी के अधिकारी मौके पर पहुंचे और क्षतिग्रस्त हिस्सों की मरम्मत शुरू कर दी। हालांकि विपक्ष और आम जनता इसे सुधार कार्य की बजाय खामियों पर पर्दा डालने की कोशिश बता रहे हैं। अधिकारियों द्वारा सड़क पर दोबारा डामर की परत बिछाकर स्थिति को संभालने का प्रयास किया गया।
इस घटना के बाद जनता के बीच यह सवाल उठ रहा है कि करोड़ों रुपये की लागत से किए जा रहे निर्माण कार्यों में गुणवत्ता नियंत्रण की जिम्मेदारी आखिर किसकी है। साथ ही यह भी चर्चा है कि क्या सड़क निर्माण में हुई कथित लापरवाही के लिए संबंधित अधिकारियों और ठेकेदारों पर कार्रवाई होगी या मामला जांच और मरम्मत तक ही सीमित रह जाएगा।
राजधानी के प्रमुख मार्ग पर सामने आई इस घटना ने एक बार फिर सरकारी निर्माण कार्यों की गुणवत्ता और निगरानी व्यवस्था को लेकर बहस छेड़ दी है। अब सभी की निगाहें प्रशासन और पीडब्ल्यूडी विभाग की आगामी कार्रवाई पर टिकी हुई हैं।