संस्कृत, संस्कृति और संस्कार के संकल्प के साथ संपन्न हुआ संस्कृत महोत्सव

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संस्कृत, संस्कृति और संस्कार के संकल्प के साथ संपन्न हुआ संस्कृत महोत्सव

25 विद्यालयों के विद्यार्थियों ने लिया हिस्सा, 234 प्रतिभाओं का हुआ सम्मान; संस्कृत समूह गीत में एमजीएम प्रथम, ज्योति स्कूल द्वितीय और केपीएस नेहरू नगर तृतीय

दुर्ग। संस्कृत को केवल भाषा या विषय नहीं, बल्कि संस्कृति, संस्कार और जीवन मूल्यों की संवाहक शक्ति के रूप में नई पीढ़ी तक पहुंचाने के उद्देश्य से संस्कृत मित्र मंडल, भिलाई-दुर्ग द्वारा संस्कृत महोत्सव का आयोजन किया गया। महोत्सव में शहर के करीब 25 विद्यालयों के विद्यार्थियों ने विभिन्न प्रतियोगिताओं में उत्साहपूर्वक भाग लिया। कार्यक्रम में लगभग 234 विद्यार्थियों एवं उनके अभिभावकों को सम्मानित किया गया।


महोत्सव में संस्कृत गीत, संस्कृत ग्रीटिंग कार्ड, संस्कृत पोस्टर, संस्कृत सुलेख और ‘ईश्वर एक नाम अनेक’ सहित विभिन्न प्रतियोगिताएं आयोजित की गईं। विद्यार्थियों द्वारा संस्कृत में तैयार किए गए ग्रीटिंग कार्ड और पोस्टर विशेष आकर्षण का केंद्र रहे। कार्यक्रम में आर्य समाज बैजनाथ पारा के प्रधान योगी राम साहू, वरिष्ठ साहित्यकार विजय कुमार गुप्ता और इन्वेस्ट एडु के मैनेजिंग को-पार्टनर नीरज खरया विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। अतिथियों ने विद्यार्थियों की प्रतिभा और संस्कृत के प्रति उनके उत्साह की सराहना की।


संस्कृत समूह गीत प्रतियोगिता में एमजीएम प्रथम
संस्कृत समूह गीत प्रतियोगिता महोत्सव का प्रमुख आकर्षण रही। विद्यार्थियों ने सामूहिक प्रस्तुति, स्वर, लय, भाव और संस्कृत उच्चारण से निर्णायकों एवं अतिथियों को प्रभावित किया।
प्रतियोगिता में एम.जी.एम. सीनियर सेकेंडरी स्कूल, सेक्टर-6 ने प्रथम स्थान प्राप्त किया। ज्योति हायर सेकेंडरी इंग्लिश मीडियम स्कूल, चरोदा की टीम द्वितीय तथा कृष्णा पब्लिक स्कूल, नेहरू नगर की टीम तृतीय स्थान पर रही।


प्रतियोगिता में दिल्ली पब्लिक स्कूल दुर्ग, डीएवी इस्पात पब्लिक स्कूल सेक्टर-2 भिलाई, कृष्णा पब्लिक स्कूल सुंदर नगर, ज्योति विद्यालय चरोदा, एमजीएम पब्लिक स्कूल शांति नगर, एमजीएम सीनियर सेकेंडरी स्कूल सेक्टर-6, श्री नारायणा गुरु विद्याभवन सेक्टर-4 और श्री शंकरा विद्यालय सेक्टर-10 सहित विभिन्न विद्यालयों ने सहभागिता की।

संस्कृत को बताया जीवन मूल्यों की भाषा
अभिभावकों एवं विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए आचार्य डॉ. अजय आर्य ने कहा कि संस्कृत को केवल भाषा अथवा विषय के रूप में नहीं पढ़ाया जाना चाहिए। यह जीवन मूल्यों को सिखाने वाली भाषा है, जिसमें संस्कृति और संस्कार जुड़े हुए हैं। उन्होंने कहा कि विद्यार्थी फिजिक्स, केमिस्ट्री, मैथ्स या किसी भी क्षेत्र में सफलता हासिल करें, लेकिन उन्हें संस्कृत के उन मूल्यों से परिचित होना चाहिए, जो ‘सर्वे भवन्तु सुखिनः’ की भावना और समस्त विश्व को परिवार मानने की दृष्टि प्रदान करते हैं।


उन्होंने कहा कि यदि संस्कृत महोत्सव के माध्यम से विद्यार्थियों में दूसरों के सुख, सहअस्तित्व और संवेदना के संस्कार विकसित होते हैं, तो यही आयोजन की सबसे बड़ी सफलता होगी।

संस्कृत मित्र मंडल की अध्यक्ष आभा चौरसिया ने कहा कि संस्कृति को जीवंत बनाए रखने के लिए संस्कृत का संरक्षण और संवर्धन आवश्यक है। संस्कृत महोत्सव विद्यार्थियों को अपनी जड़ों से जोड़ने तथा भारतीय संस्कृति के प्रति गौरव की भावना विकसित करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है।


वरिष्ठ साहित्यकार विजय कुमार गुप्ता ने साहित्य और संस्कृति को जीवन की संवेदनशीलता से जोड़ने का संदेश दिया। योगी राम साहू ने भारतीय परंपरा और संस्कारों को जीवन में अपनाने की प्रेरणा दी, जबकि नीरज खरया ने विद्यार्थियों को प्रतिभा के साथ मानवीय मूल्यों के विकास पर जोर दिया।


महोत्सव में संस्कृत विषय में उल्लेखनीय एवं उत्कृष्ट अंक प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों के साथ उनके अभिभावकों को भी सम्मानित किया गया। आयोजकों ने कहा कि विद्यार्थी की सफलता में परिवार, विद्यालय और शिक्षक तीनों की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। इसी भावना के साथ अभिभावकों को भी सम्मान प्रदान किया गया।


विभिन्न प्रतियोगिताओं में निर्णायक की भूमिका निभाने वाले प्रबुद्धजनों एवं शिक्षकों का भी सम्मान किया गया। इनमें प्रेम प्रकाश शास्त्री, पतिराम साहू, मोहनलाल आर्य, हेमा सक्सेना, ऋचा श्रीवास्तव और प्राचार्य अंजू ठाकुर शामिल रहे।


कार्यक्रम को सफल बनाने में आभा चौरसिया, अनुपमा उपाध्याय, अमित मिश्रा, झरना धमदे, जसविंदर कौर, वंदना सिंह, धीरज मणि और चंद्रप्रकाश सहित अनेक लोगों ने सहयोग दिया। अभिभावकों के स्वागत में शीला लाकुडकर, संदीपा अरोरा, संयोगिता त्रिपाठी और प्रीति भट्ट की भूमिका रही। डॉ. वागीश चंद्र त्रिपाठी, संतोष दाहतोंडे, अनीता शुक्ला, आभा नेवालकर, जॉली थॉमस और वेद प्रकाश ने भी आयोजन को सफल बनाने में विशेष योगदान दिया।


संस्कृत महोत्सव का समापन केवल पुरस्कार वितरण के साथ नहीं, बल्कि संस्कृत, संस्कृति और संस्कार को जीवन से जोड़ने के संकल्प के साथ हुआ। आयोजन ने विद्यार्थियों और अभिभावकों को यह संदेश दिया कि संस्कृत आज भी भारतीय सांस्कृतिक चेतना, मानवीय मूल्यों और जीवन दृष्टि को नई पीढ़ी तक पहुंचाने की समर्थ भाषा है।

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