
नई दिल्ली। : अगर आप किसी खाद्य उत्पाद को खरीदने से पहले पैकेट पर लिखे दावों को देखकर उसकी गुणवत्ता तय करते हैं, तो यह खबर आपके लिए अहम है। भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने खाद्य और पेय पदार्थों से जुड़े 150 से अधिक निर्माताओं और कंपनियों को नोटिस जारी किया है। इन कंपनियों पर विज्ञापनों में भ्रामक दावे करने और पैकेजिंग से जुड़े नियमों का कथित तौर पर पालन नहीं करने के आरोप हैं। जांच के दायरे में बच्चों के खाद्य उत्पादों से लेकर चॉकलेट, एनर्जी ड्रिंक, शीतल पेय और नारियल तेल जैसे रोजमर्रा में इस्तेमाल होने वाले कई उत्पाद शामिल हैं।
बड़े-बड़े ब्रांड भी जांच के दायरे में
FSSAI की कार्रवाई में कई चर्चित कंपनियों के नाम सामने आए हैं। इनमें नेस्ले इंडिया, पेप्सिको, एबॉट इंडिया, रेड बुल इंडिया, डैनोन इंडिया, मॉन्स्टर एनर्जी, मोंडेलेज इंडिया, कोका-कोला इंडिया, फेरेरो इंडिया और केनव्यू समेत अन्य कंपनियां शामिल हैं। मामले में कंपनियों के विज्ञापनों और उत्पादों की पैकेजिंग पर किए गए दावों की जांच की गई है। नियामक ने ऐसे दावों पर आपत्ति जताई है, जिन्हें उपभोक्ताओं को उत्पाद की गुणवत्ता या स्वास्थ्य संबंधी लाभों को लेकर भ्रमित करने वाला माना गया।
बेबी फूड के दावों पर उठे सवाल
सबसे अधिक दावे केरल के मलप्पुरम स्थित जुजा फूड्स के इंस्टेंट बेबी फूड उत्पाद को लेकर सामने आए। कंपनी के प्रचार में उत्पाद को पोषण से भरपूर, आसानी से पचने वाला और बच्चों के लिए फायदेमंद बताया गया था। इसके अलावा उत्पाद से जुड़े कई स्वास्थ्य और पोषण संबंधी दावे भी किए गए थे। FSSAI ने इन दावों को लेकर आपत्ति जताई। इसके बाद कंपनी ने कथित तौर पर आपत्तिजनक दावों को हटाने पर सहमति जताई और सुधार प्रक्रिया पूरी होने तक अपनी बिक्री वेबसाइट को बंद कर दिया।
चॉकलेट के विज्ञापनों पर भी कार्रवाई
मोंडेलेज इंडिया के उत्पादों से जुड़े कुछ विज्ञापनों में स्वास्थ्य और पोषण संबंधी दावों को लेकर भी आपत्ति दर्ज की गई। नोटिस मिलने के बाद कंपनी ने ऑनलाइन प्लेटफॉर्म से संबंधित दावों और प्रचार सामग्री को हटाने की बात कही है।
‘100% शुद्ध’ लिखने पर भी सवाल
नारियल तेल से जुड़े एक मामले में एमवे इंडिया के उत्पाद की पैकेजिंग और प्रचार में ‘100 प्रतिशत शुद्ध’ जैसे शब्दों के इस्तेमाल पर सवाल उठाया गया। FSSAI के मुताबिक खाद्य उत्पादों पर इस तरह के दावे उपभोक्ता को भ्रमित कर सकते हैं। कंपनी ने जवाब में बताया कि उसने संबंधित शब्दों को पैकेजिंग और प्रचार सामग्री से हटाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। पुराने पैकेज वाले स्टॉक को भी हटाने की बात कही गई है।
उत्पाद के नाम पर भी FSSAI की नजर
एक अन्य मामले में किसी उत्पाद के ट्रेड नेम को ही भ्रामक माना गया। FSSAI की कार्रवाई के बाद संबंधित कंपनी ने अपने दावों और प्रचार सामग्री में बदलाव किया। वहीं, एक ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म ने भी संबंधित उत्पाद को अपनी वेबसाइट से हटाने की जानकारी दी।
ग्राहकों के लिए जरूरी सबक
इस कार्रवाई के बाद उपभोक्ताओं के लिए सबसे अहम संदेश यही है कि सिर्फ पैकेट के सामने लिखे दावों के आधार पर कोई खाद्य उत्पाद न खरीदें। खरीदारी से पहले पैकेट के पीछे दी गई सामग्री की सूची, पोषण संबंधी जानकारी, समाप्ति की तारीख, निर्माता का विवरणऔर FSSAI लाइसेंस संबंधी जानकारी जरूर जांचें। खासकर बच्चों के खाद्य पदार्थ खरीदते समय स्वास्थ्य संबंधी बड़े-बड़े दावों को लेकर अतिरिक्त सावधानी बरतना जरूरी है। FSSAI की निगरानी आगे भी जारी रहने की बात कही गई है। जिन कंपनियों को सुधार के निर्देश दिए गए हैं, उनके अनुपालन पर भी नजर रखी जा रही है। नियमों का पालन नहीं करने वाले मामलों में आगे नियमानुसार कार्रवाई की जा सकती है।