
दुर्ग (अंजोरा)। पशुचिकित्सा एवं पशुपालन महाविद्यालय, अंजोरा में छत्तीसगढ़, ओडिशा और मध्यप्रदेश के सूकर पालक किसानों एवं उद्यमियों के लिए आयोजित तीन दिवसीय “सूकर पालन प्रबंधन एवं उद्यमिता विकास प्रशिक्षण” का शुक्रवार को समापन हुआ। प्रशिक्षण पूर्ण करने वाले 75 प्रतिभागियों को प्रमाण पत्र प्रदान किए गए।
कार्यक्रम का आयोजन 17 जुलाई 2026 को कुलपति डॉ. आर.आर.बी. सिंह के मार्गदर्शन, अधिष्ठाता डॉ. सुशांत पाल तथा विस्तार शिक्षा निदेशक डॉ. मनोज कुमार गेंदले के निर्देशन में किया गया। समापन समारोह में अधिष्ठाता डॉ. सुशांत पाल, संयुक्त संचालक डॉ. एस.एल. उइके, निदेशक विस्तार शिक्षा डॉ. मनोज कुमार गेंदले, निदेशक फार्म डॉ. धीरेंद्र भोंसले, प्रोफेसर डॉ. के. दास, जनसंपर्क अधिकारी डॉ. दिलीप चौधरी, प्रशिक्षण आयोजक डॉ. रामचंद्र रामटेके सहित डॉ. डी.के. जोल्हे, डॉ. दीप्ति, डॉ. रजनी, डॉ. जागृति, डॉ. भानु, प्राध्यापकगण, छात्र-छात्राएं तथा विभिन्न जिलों से आए 75 प्रशिक्षणार्थी किसान उपस्थित रहे।
प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों को सूकर की उन्नत नस्लें, नस्ल सुधार, पोषण एवं आवास प्रबंधन, चारा उत्पादन, वैल्यू एडिशन, मांस उत्पादन तकनीक, विभिन्न रोगों की पहचान एवं रोकथाम, प्राथमिक उपचार, सरकारी योजनाएं, बैंक ऋण प्रक्रिया तथा आधुनिक सूकर पालन की व्यावसायिक संभावनाओं की विस्तृत जानकारी दी गई। इसके अलावा प्रगतिशील उद्यमी ग्रेसी दुग्गा के साथ संवाद सत्र आयोजित किया गया तथा प्रतिभागियों को सूकर फार्म एवं चारा उत्पादन इकाइयों का भ्रमण भी कराया गया।
कार्यक्रम का संचालन डॉ. वंदना भगत ने किया, जबकि आभार प्रदर्शन डॉ. शब्बीर अनंत ने किया। आयोजन का उद्देश्य किसानों एवं उद्यमियों को वैज्ञानिक तकनीकों से जोड़कर सूकर पालन को लाभकारी एवं आत्मनिर्भर व्यवसाय के रूप में विकसित करना रहा।