दुर्ग उपभोक्ता आयोग का बड़ा फैसला: नशे का हवाला देकर बीमा दावा खारिज करना पड़ा महंगा, कंपनी को 50 लाख रुपये चुकाने का आदेश

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दुर्ग उपभोक्ता आयोग का बड़ा फैसला: नशे का हवाला देकर बीमा दावा खारिज करना पड़ा महंगा, कंपनी को 50 लाख रुपये चुकाने का आदेश

दुर्ग। जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग, दुर्ग ने बीमा दावा निरस्त करने के मामले में महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए आईसीआईसीआई लोम्बार्ड जनरल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड को परिवादी को 50 लाख रुपये की बीमा दावा राशि अदा करने का आदेश दिया है। आयोग ने कंपनी की ओर से बीमा दावा निरस्त करने को सेवा में कमी और व्यावसायिक कदाचरण माना।


मामले के अनुसार, भिलाई निवासी श्रीमती उषा सिंह के पति स्व. राजभान सिंह के लिए स्टील एम्प्लाई वेलफेयर एसोसिएशन, भिलाई इस्पात संयंत्र के माध्यम से 1 मार्च 2023 से 29 फरवरी 2024 तक 50 लाख रुपये का दुर्घटना बीमा कराया गया था। 8 अप्रैल 2023 को सड़क दुर्घटना में गंभीर रूप से घायल होने के बाद उपचार के दौरान 9 अप्रैल 2023 को राजभान सिंह की मृत्यु हो गई।


इसके बाद परिवादी ने बीमा दावा प्रस्तुत किया, जिसे बीमा कंपनी ने यह कहते हुए निरस्त कर दिया कि दुर्घटना के समय बीमित व्यक्ति नशे या किसी अन्य नशीले पदार्थ के प्रभाव में था। परिवादी ने बीमा कंपनी के इस निर्णय को चुनौती देते हुए जिला उपभोक्ता आयोग में परिवाद दायर किया और 50 लाख रुपये की बीमा राशि, ब्याज एवं अन्य राहत की मांग की।


मामले की सुनवाई के दौरान बीमा कंपनी और संबंधित संस्था की ओर से लिखित जवाब प्रस्तुत नहीं किया गया और आयोग द्वारा भेजे गए नोटिस की तामिली के बावजूद वे सुनवाई में उपस्थित नहीं हुए। आयोग ने मामले में प्रस्तुत दस्तावेजों का अवलोकन करते हुए पाया कि दुर्घटना के कारण लगी चोटों के चलते राजभान सिंह की उपचार के दौरान मृत्यु हुई थी। वहीं, बीमा दावा निरस्त करने के लिए नशे के प्रभाव से संबंधित कोई ठोस दस्तावेजी साक्ष्य बीमा कंपनी द्वारा प्रस्तुत नहीं किया गया।


आयोग की सदस्य श्रीमती संध्या बाजपेयी ने 23 जुलाई 2026 को पारित आदेश में कहा कि बीमा कंपनी द्वारा दावा निरस्त करना सेवा में कमी और घोर व्यावसायिक दुराचरण की श्रेणी में आता है।

आयोग ने परिवाद को आंशिक रूप से स्वीकार करते हुए आईसीआईसीआई लोम्बार्ड जनरल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड को आदेश दिया कि वह आदेश की तारीख से 30 दिनों के भीतर परिवादी को 50 लाख रुपये की बीमा दावा राशि का भुगतान करे।
निर्धारित अवधि में राशि का भुगतान नहीं करने पर कंपनी को भुगतान की तारीख तक 6 प्रतिशत वार्षिक साधारण ब्याज भी देना होगा। इसके अलावा आयोग ने परिवादी को वाद व्यय के रूप में 5,000 रुपये अदा करने का भी आदेश दिया है। वहीं, स्टील एम्प्लाई वेलफेयर एसोसिएशन, भिलाई इस्पात संयंत्र के विरुद्ध दायर परिवाद को आयोग ने खारिज कर दिया।

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