
हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ताओं को दी छूट– “गतिविधि शुरू होने पर दोबारा कर सकेंगे पिटीशन फाइल।”
बिलासपुर: छत्तीसगढ़ के स्कूलों में प्रार्थनाओं और मंत्रों के पाठ को अनिवार्य किए जाने के मामले में आज बिलासपुर हाईकोर्ट में अहम सुनवाई हुई। मामले की सुनवाई करते हुए जस्टिस एके प्रसाद की सिंगल बेंच ने इस संबंध में दायर की गई याचिका को खारिज कर दिया है।
सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से न्यायालय में स्पष्ट किया गया कि प्रदेश के किसी भी स्कूल में अभी तक इस नियम को लागू नहीं किया गया है। राज्य सरकार की इस दलील को सुनने के बाद हाईकोर्ट ने मामले को फिलहाल खारिज कर दिया। हालांकि, कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं को यह विशेष छूट दी है कि यदि भविष्य में स्कूलों में इस तरह की गतिविधियां शुरू होती हैं या इसे लागू किया जाता है, तो वे न्यायालय में दोबारा याचिका (पिटीशन) दायर कर सकते हैं।
क्या है पूरा मामला?
गौरतलब है कि राज्य सरकार द्वारा बीते 12 जून को एक सर्कुलर जारी किया गया था। इस सर्कुलर के खिलाफ छत्तीसगढ़ वक्फ बोर्ड के पूर्व अध्यक्ष अब्दुल सलमान रिज़वी समेत अन्य लोगों ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। याचिकाकर्ताओं ने कोर्ट में दायर अपनी याचिका में भारतीय संविधान के अनुच्छेद 28 (Article 28) के उल्लंघन का जिक्र करते हुए इस आदेश को चुनौती दी थी। लेकिन सरकार के जवाब के बाद कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं को भविष्य में अपील की छूट देते हुए वर्तमान याचिका को खारिज कर दिया है।