CGPSC घोटाला: भिलाई, रायपुर और राजनांदगांव समेत 10 ठिकानों पर ED का छापा

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CGPSC घोटाला: भिलाई, रायपुर और राजनांदगांव समेत 10 ठिकानों पर ED का छापा

पूर्व सचिव जीवन किशोर ध्रुव और कृषि विस्तार अधिकारी के घर तड़के सुबह दी दबिश
​मामले के मुख्य आरोपी टामन सिंह सोनवानी और ललित गनवीर अभी भी जेल में
​सीबीआई (CBI) के बाद अब प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने तेज की कार्रवाई

भिलाई/ छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित लोक सेवा आयोग (CGPSC) भर्ती घोटाले में बुधवार को प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने बड़ी कार्रवाई की है। ईडी की अलग-अलग टीमों ने भिलाई, दुर्ग, राजनांदगांव और रायपुर सहित प्रदेश के 10 ठिकानों पर एक साथ छापामार कार्रवाई की है। इस मामले में पूर्व में सीबीआई (CBI) जांच कर रही थी, जिसके बाद अब वित्तीय अनियमितताओं को लेकर ईडी ने मोर्चा संभाल लिया है।

​भिलाई और राजनांदगांव में अहम ठिकानों पर दबिश
प्राप्त जानकारी के अनुसार, ईडी ने पीएससी के पूर्व सचिव जीवन किशोर ध्रुव के भिलाई स्थित सेक्टर-10, सड़क 44, क्वार्टर नंबर 9सी में दबिश दी है, जहां जांच एजेंसियों की कार्रवाई लगातार जारी है।

वहीं, राजनांदगांव की शिक्षक कॉलोनी निवासी कृषि विस्तार अधिकारी भूपेंद्र गनवीर के घर भी बुधवार सुबह लगभग 06:30 बजे ईडी ने छापा मारा है। घर के भीतर अधिकारियों द्वारा उनसे कड़ी पूछताछ की जा रही है। गौरतलब है कि भूपेंद्र गनवीर, सीजीपीएससी घोटाले के एक अन्य प्रमुख आरोपी ललित गनवीर के भाई हैं। ललित गनवीर फिलहाल मुख्य आरोपी टामन सिंह सोनवानी के साथ जेल में बंद हैं। इस प्रकरण में हालांकि ज्यादातर आरोपियों को जमानत मिल चुकी है, लेकिन मुख्य साजिशकर्ता अभी भी सलाखों के पीछे हैं।


यह घोटाला वर्ष 2020 से 2022 के बीच आयोजित सीजीपीएससी भर्ती परीक्षाओं से जुड़ा है। आरोप है कि चयन प्रक्रिया को प्रभावित कर कुछ चुनिंदा अभ्यर्थियों, रसूखदारों के रिश्तेदारों और अधिकारियों के करीबियों को अनुचित लाभ पहुंचाया गया।

छत्तीसगढ़ सरकार के कड़े रुख और अनुरोध के बाद इस मामले की जांच सीबीआई को सौंपी गई थी। सीबीआई जांच में यह बात सामने आई थी कि तत्कालीन सचिव जीवन किशोर ध्रुव ने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए अपने बेटे सुमित ध्रुव सहित कई प्रभावशाली लोगों के रिश्तेदारों को फायदा पहुंचाने में अहम भूमिका निभाई थी।


​जांच के दौरान सीबीआई ने ध्रुव समेत अन्य आरोपियों को गिरफ्तार किया था और बाद में अदालत में पूरक आरोपपत्र (सप्लीमेंट्री चार्जशीट) भी पेश किया था। इस आरोपपत्र में भर्ती प्रक्रिया में की गई अनियमितताओं, अधिकारियों की मिलीभगत और चयन प्रक्रिया में सीधे हस्तक्षेप का विस्तृत उल्लेख किया गया है।

पीएससी भर्ती घोटाला छत्तीसगढ़ के सबसे संवेदनशील और चर्चित मामलों में से एक है। इसमें कई चयनित अधिकारियों, उनके परिजनों और आयोग के तत्कालीन उच्च पदाधिकारियों की भूमिका जांच के दायरे में है। अब ईडी की इस ताजा छापेमारी से घोटाले में पैसों के लेन-देन (मनी लॉन्ड्रिंग) के कई और बड़े खुलासे होने की उम्मीद जताई जा रही है।

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