
आचार्य डॉ. अजय आर्य ने प्रदर्शनी का अवलोकन कर कलाकारों से किया संवाद
भिलाई। ध्रुव आर्ट स्टूडियो एंड गैलरी में आयोजित सिरेमिक कला प्रदर्शनी ‘माटी का अवतरण’ देशभर के कलाकारों की रचनात्मक प्रतिभा और सिरेमिक कला के समकालीन प्रयोगों का प्रमुख मंच बनकर उभरी है। प्रदर्शनी में असम, बंगाल, गुवाहाटी, ओडिशा, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, उत्तर प्रदेश और बिहार सहित विभिन्न राज्यों के कलाकारों की कलाकृतियां प्रदर्शित की गई हैं।
प्रदर्शनी का अवलोकन करने पहुंचे आचार्य डॉ. अजय आर्य का ध्रुव तिवारी एवं कलाकारों ने पुष्पगुच्छ भेंट कर स्वागत किया। डॉ. आर्य ने विभिन्न कलाकृतियों का अवलोकन किया और चिरायु कुमार सिन्हा, डॉ. छगेंद्र उसेंडी, कृष्णा पड़िया सहित अनेक कलाकारों से संवाद किया।
इस अवसर पर डॉ. अजय आर्य ने कहा कि कला एक साधना है और उसे समझना भी एक साधना है। उन्होंने मिट्टी के दार्शनिक पक्ष को रेखांकित करते हुए कहा कि मिट्टी मनुष्य को जीवन की क्षणभंगुरता का बोध कराती है। मिट्टी में दबा बीज अंकुरित होकर अनेक नए बीजों को जन्म देता है। जीवन की क्षणभंगुरता को समझने और स्वीकार करने से अनेक जीवनगत समस्याओं का समाधान संभव है।
उन्होंने सिरेमिक कलाकार चिरायु कुमार सिन्हा के कार्यों की सराहना करते हुए कहा कि उनकी कला में तकनीक, प्रयोग और स्थानीय संवेदना का सुंदर समन्वय दिखाई देता है और उनका सिरेमिक कार्य छत्तीसगढ़ की पहचान बनता जा रहा है।
डॉ. आर्य ने कलाकार दीपा पंत की कलाकृति को भी विशेष रूप से उल्लेखनीय बताया। उन्होंने कहा कि उनकी कृति में नारी जीवन की विडंबना, सामाजिक विसंगतियों और उत्पीड़न को प्रभावशाली ढंग से अभिव्यक्त किया गया है। आंखों पर लगाए गए ताले के माध्यम से यह सवाल उठाया गया है कि महिलाओं को क्या देखना चाहिए और क्या नहीं—इस पर समाज की अदृश्य बंदिशें किस प्रकार प्रभाव डालती हैं।
प्रदर्शनी में प्रवीण कुमार प्रजापति, जितेन साहू, चिरायु कुमार सिन्हा, अपूर्वा नंदी, अनंत साहू, डॉ. छगेंद्र उसेंडी, चंचल बंगा, धरम नेताम, हुकुम लाल वर्मा और कृष्णा पड़िया सहित अनेक कलाकारों की कृतियां प्रदर्शित हैं। इन कलाकृतियों में मिट्टी के माध्यम से स्मृति, परंपरा, प्रकृति, स्त्री जीवन, सामाजिक सरोकार, मानवीय संवेदना और समकालीन चिंतन को अभिव्यक्ति दी गई है।
ध्रुव आर्ट स्टूडियो एंड गैलरी के फाउंडर डॉ. ध्रुव तिवारी ने कहा कि ‘माटी का अवतरण’ मिट्टी का उत्सव है, जो कलाकारों की कल्पना और हाथों से निरंतर नए रूप ग्रहण करती है। सिरेमिक कला में परंपरा, स्मृति, परिवर्तन और प्रयोग की असीम संभावनाएं हैं।
क्यूरेटर चिरायु कुमार सिन्हा ने बताया कि प्रदर्शनी का उद्देश्य देशभर के सिरेमिक कलाकारों को साझा मंच प्रदान करना और मिट्टी की बहुमुखी कलात्मक संभावनाओं को सामने लाना है। वहीं डायरेक्टर डॉ. तरुणा माथुर ने कहा कि प्रदर्शनी में फॉर्म, टेक्सचर, सरफेस, प्रतीक और मटेरियलिटी के विविध आयाम देखने को मिल रहे हैं।
देशभर के कलाकारों की भागीदारी
प्रदर्शनी में अनंत साहू, अपूर्वा नंदी, डॉ. छगेंद्र उसेंडी, चंचल बंगा, चिरायु कुमार सिन्हा, दीपा पंत, धरम नेताम, हुकुम लाल वर्मा, जितेन साहू, खुशबू राठी, कृष्णा पड़िया, डॉ. लकी टोंक, मनीषा वर्मा, मोहन लाल बराल, पल्लवी सिंह, पवन कुमार शर्मा, प्रवीण कुमार प्रजापति, पृथ्वी सिंहदेव, पूर्वा शर्मा, रबी नारायण गुप्ता, रानी मदाने, संदीप किंडो, प्रो. शिबा प्रसाद, सुरेश कुमार कुंभका, विजया त्रिपाठी, योगेंद्र त्रिपाठी एवं प्रेम शंकर प्रसाद सहित अनेक कलाकारों की कृतियां शामिल हैं।
देश के विभिन्न हिस्सों से कलाकारों की भागीदारी के चलते ध्रुव आर्ट स्टूडियो एंड गैलरी राष्ट्रीय स्तर पर कला प्रेमियों के आकर्षण का केंद्र बन रहा है। आने वाले समय में विदेशी कलाकारों के भी इससे जुड़ने की संभावना जताई गई है। ‘माटी का अवतरण’ यह दर्शाता है कि मिट्टी केवल धरती का तत्व नहीं, बल्कि स्मृति, संस्कृति, संवेदना, संघर्ष और कल्पना को अभिव्यक्त करने वाली जीवंत कला-भाषा भी है।