
इंदौर। : मध्य प्रदेश के इंदौर में लोकायुक्त पुलिस ने आय से अधिक संपत्ति के मामले में महिला एवं बाल विकास विभाग के संयुक्त संचालक लक्ष्मी नारायण कंडवाल के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की है। बुधवार सुबह लोकायुक्त की टीम ने उनके विभिन्न ठिकानों पर एक साथ छापेमारी कर महत्वपूर्ण दस्तावेज और संपत्ति संबंधी जानकारी जुटाई।
प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि अधिकारी के पास उनकी घोषित आय की तुलना में कई गुना अधिक संपत्ति मौजूद है। लोकायुक्त अधिकारियों के अनुसार, अब तक करीब 10 करोड़ 82 लाख 73 हजार रुपये की चल-अचल संपत्तियों का पता चला है, जबकि उनके पूरे सेवा काल में अनुमानित वैध आय लगभग ढाई करोड़ रुपये बताई जा रही है। लोकायुक्त की प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि लगभग 30 वर्षों की शासकीय सेवा के दौरान कंडवाल की वैध आय करीब 2.50 करोड़ रुपये रही, जबकि उनके पास पाई गई संपत्ति इस आय की तुलना में लगभग 287.7 प्रतिशत अधिक बताई जा रही है।
तीन ठिकानों पर एक साथ दबिश
सूत्रों के मुताबिक, लोकायुक्त को अधिकारी के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति की शिकायत प्राप्त हुई थी। शिकायत की जांच और सत्यापन के बाद विशेष टीम गठित की गई। बुधवार तड़के अधिकारियों ने योजनाबद्ध तरीके से कार्रवाई करते हुए इंदौर स्थित तीन अलग-अलग स्थानों पर एक साथ छापेमारी की। लोकायुक्त टीम ने विशेष न्यायालय से तलाशी वारंट प्राप्त करने के बाद कार्रवाई को अंजाम दिया। जांच के दौरान कई वित्तीय दस्तावेज, बैंक रिकॉर्ड और संपत्ति से जुड़े कागजात खंगाले गए। वहीं जांच के दौरान एक पांच मंजिला व्यावसायिक भवन का पता चला, जिसकी अनुमानित कीमत 2.66 करोड़ रुपये से अधिक आंकी गई है। भवन में सुपर मार्केट और जिम संचालित होने की जानकारी सामने आई है।
परिवार की आय को बताया अतिरिक्त स्रोत
पूछताछ के दौरान अधिकारी ने अपनी आय के अतिरिक्त स्रोतों की भी जानकारी दी। उन्होंने बताया कि उनके परिवार द्वारा संचालित व्यवसायों से नियमित आय होती है। उनके अनुसार दोनों पुत्रों के डिपार्टमेंटल स्टोर से आमदनी होती है, जबकि पत्नी सिलाई और अन्य घरेलू कार्यों के माध्यम से आय अर्जित करती हैं। इसके अलावा एक व्यावसायिक भवन में संचालित जिम से किराए की राशि प्राप्त होने का भी दावा किया गया है।
बैंक लॉकर और खातों की जांच जारी
जांच के दौरान एक बैंक लॉकर का भी पता चला, जिसमें बड़ी मात्रा में सोने के आभूषण और अन्य मूल्यवान वस्तुएं मिलने की जानकारी सामने आई है। इसके साथ ही कई बैंक खातों की भी जांच की जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि बैंकिंग रिकॉर्ड और वित्तीय लेन-देन की जांच पूरी होने के बाद संपत्ति का वास्तविक आंकड़ा और बढ़ सकता है।
कई जिलों में रही पदस्थापना
लोकायुक्त अधिकारियों के अनुसार लक्ष्मी नारायण कंडवाल ने अपने लंबे सेवाकाल के दौरान राज्य के कई जिलों में महत्वपूर्ण पदों पर कार्य किया है। जांच एजेंसियां अब उनकी संपत्तियों, निवेश और आय के स्रोतों का विस्तृत सत्यापन कर रही हैं। फिलहाल लोकायुक्त की कार्रवाई जारी है और जांच पूरी होने के बाद मामले में आगे की कानूनी प्रक्रिया अपनाई जाएगी।