
चेन्नई। चुनाव जीतने के तुरंत बाद विधायक द्वारा इस्तीफा देकर उसी विधानसभा क्षेत्र से किसी दूसरी पार्टी के टिकट पर उपचुनाव लड़ने के मामले में मद्रास हाईकोर्ट ने गंभीर चिंता जताई है। जस्टिस एस.एम. सुब्रमण्यम और जस्टिस के. गोविंदराजन की खंडपीठ ने निर्वाचन आयोग (ECI) से ऐसी परिस्थितियों से निपटने के लिए आवश्यक दिशा-निर्देशों पर विचार करने को कहा है।
मामला अधिवक्ता के. सुथन की ओर से दायर जनहित याचिका (PIL) से जुड़ा है। याचिका में चुनाव के तुरंत बाद स्वेच्छा से इस्तीफा देने वाले निर्वाचित प्रतिनिधियों की वित्तीय जवाबदेही तय करने की मांग की गई है। याचिकाकर्ता ने सुझाव दिया है कि ऐसे मामलों में उपचुनाव पर होने वाले सार्वजनिक खर्च की भरपाई के लिए ‘Election Expenditure Security’ की व्यवस्था की जा सकती है। साथ ही, उपयुक्त कानूनी प्रावधानों के जरिए कुछ मामलों में ‘कूलिंग-ऑफ पीरियड’ या चुनाव लड़ने से संबंधित अयोग्यता पर भी विचार करने की मांग की गई है।
मतदाताओं के अधिकार को लेकर कोर्ट की चिंता
सुनवाई के दौरान पीठ ने इस बात पर सवाल उठाया कि चुनाव जीतने के कुछ ही समय बाद पद छोड़कर दोबारा उसी सीट से चुनाव लड़ने की स्थिति में मतदाताओं के जनादेश का क्या होगा। कोर्ट ने मौखिक टिप्पणी में कहा कि ऐसी स्थिति लोकतांत्रिक प्रक्रिया और मतदाताओं के अधिकारों पर सवाल खड़े करती है। कोर्ट ने ECI से पूछा कि इस तरह की परिस्थितियों से निपटने के लिए दिशा-निर्देश क्यों नहीं बनाए जा सकते।
मदुरंथकम और धारापुरम उपचुनाव का मामला
याचिका में तमिलनाडु की मदुरंथकम और धारापुरम विधानसभा सीटों पर होने वाले उपचुनाव का भी उल्लेख किया गया। याचिकाकर्ता के अनुसार, इन सीटों के पूर्व AIADMK विधायकों ने चुनाव के बाद इस्तीफा दिया और बाद में TVK में शामिल होकर उन्हीं निर्वाचन क्षेत्रों से दोबारा चुनाव लड़ने की स्थिति बनी। इन सीटों पर उपचुनाव 6 अक्टूबर को प्रस्तावित हैं।
याचिकाकर्ता ने मांग की थी कि इस्तीफा देने वाले विधायक यदि दोबारा उसी सीट से चुनाव लड़ते हैं तो उनसे उपचुनाव के अनुमानित खर्च के बराबर ‘Election Expenditure Security’ जमा कराई जाए और इसे नामांकन दाखिल करने की शर्त बनाया जाए।
उपचुनाव पर रोक लगाने से कोर्ट का इनकार
हालांकि, मद्रास हाईकोर्ट ने फिलहाल मदुरंथकम और धारापुरम में चुनाव प्रक्रिया पर रोक लगाने से इनकार कर दिया। कोर्ट ने कहा कि एक बार चुनाव प्रक्रिया शुरू होने के बाद उसमें न्यायिक हस्तक्षेप की सीमा रहती है। साथ ही, पीठ ने यह भी माना कि निर्वाचित प्रतिनिधियों के जल्द इस्तीफे और उसके बाद उपचुनाव लड़ने से जुड़ा मुद्दा नीतिगत और कानूनी स्तर पर विचार की मांग करता है।
सुनवाई के दौरान एडवोकेट जनरल विजय नारायण ने अदालत को बताया कि विधायकों के इस्तीफे से संबंधित एक अन्य मामला पहले ही मुख्य न्यायाधीश एस.ए. धर्माधिकारी और जस्टिस जी. अरुल मुरुगन की पीठ के समक्ष सुना जा चुका है और आदेश सुरक्षित रखा गया है। इसके बाद मौजूदा पीठ ने रजिस्ट्री को मामले को उसी पीठ के समक्ष रखने का निर्देश दिया और सुनवाई स्थगित कर दी।
कानूनी स्थिति: हाईकोर्ट की ये टिप्पणियां फिलहाल मुख्य रूप से मौखिक टिप्पणियों और ECI से दिशा-निर्देश पर विचार करने के आग्रह के रूप में सामने आई हैं। किसी नए ‘कूलिंग-ऑफ पीरियड’ या इस्तीफा देने वाले विधायक से उपचुनाव का खर्च अनिवार्य रूप से वसूलने की व्यवस्था अभी इस सुनवाई से स्वतः लागू नहीं हुई है।