
याचिका में वित्त मंत्रालय के सितंबर के नोटिफिकेशन को रद्द करने की मांग, आम उपभोक्ताओं पर असर पड़ने की जताई आशंका
नई दिल्ली। ₹2,000 से अधिक के चुनिंदा कमर्शियल UPI लेन-देन पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) लागू किए जाने के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई है। वकील अंजन दत्ता की ओर से दायर रिट याचिका में केंद्र सरकार, भारतीय रिजर्व बैंक (RBI), नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) और UPI एंड सर्विसेज स्टीयरिंग कमेटी को पक्षकार बनाया गया है। याचिका में 14 सितंबर को वित्त मंत्रालय की ओर से जारी गजट नोटिफिकेशन समेत संबंधित प्रावधानों को रद्द करने की मांग की गई है।
याचिकाकर्ता का तर्क है कि बड़े कमर्शियल UPI लेन-देन पर MDR लागू होने से कारोबारियों की लागत बढ़ सकती है और इसका अप्रत्यक्ष असर ग्राहकों तक पहुंचने की आशंका है। हालांकि, सरकार ने स्पष्ट किया है कि MDR ग्राहक से वसूला जाने वाला टैक्स या सरकारी शुल्क नहीं है और बैंकों को यह सुनिश्चित करने की सलाह दी गई है कि मर्चेंट यह लागत ग्राहकों पर न डालें।
₹2,000 तक के UPI भुगतान पर शुल्क नहीं
वित्त मंत्रालय ने 14 सितंबर 2026 को Payment and Settlement Systems Act, 2007 की धारा 10A के तहत अधिसूचना जारी कर RuPay डेबिट कार्ड और ₹2,000 तक के UPI लेन-देन को ऐसे इलेक्ट्रॉनिक भुगतान माध्यम के रूप में निर्दिष्ट किया, जिन पर बैंक या सिस्टम प्रोवाइडर भुगतान करने या प्राप्त करने वाले व्यक्ति से प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष शुल्क नहीं लगा सकते।
सरकार ने 15 सितंबर को स्पष्ट किया कि नए ढांचे का असर Person-to-Person (P2P) UPI भुगतान पर नहीं पड़ेगा। राशि कितनी भी हो, P2P लेन-देन मुफ्त रहेगा। ₹2,000 तक के मर्चेंट भुगतान और जीरो-MDR व्यवस्था के तहत आने वाले छोटे व्यापारियों के लेन-देन भी शुल्क-मुक्त रहेंगे। सरकार के अनुसार करीब 96 प्रतिशत P2M लेन-देन पर नए MDR ढांचे का असर नहीं पड़ेगा।
चुनिंदा बड़े मर्चेंट भुगतान पर MDR
सरकार द्वारा जारी जानकारी के अनुसार ₹2,000 से अधिक के चुनिंदा P2M UPI लेन-देन पर MDR लागू किया जाएगा। 15 अक्टूबर 2026 से प्रभावी ढांचे में सामान्य दर 0.4 प्रतिशत रखी गई है और ₹75,000 या उससे अधिक के लेन-देन पर अधिकतम MDR ₹300 होगा। रेलवे, टेलीकॉम, इंश्योरेंस, फ्यूल और कुछ अन्य निर्धारित क्षेत्रों में ₹2,000 से अधिक के लेन-देन के लिए ₹5 का फ्लैट MDR निर्धारित किया गया है। कैपिटल मार्केट से जुड़े लेन-देन के लिए 0.02 प्रतिशत की दर और ₹300 की अधिकतम सीमा रखी गई है।
MDR क्या है?
Merchant Discount Rate यानी MDR वह शुल्क है जो डिजिटल भुगतान को प्रोसेस करने के लिए पेमेंट इकोसिस्टम में लिया जाता है। सरकार के अनुसार यह कोई टैक्स नहीं है और न ही इसे सरकार या NPCI सीधे टैक्स के रूप में वसूलता है। यह भुगतान व्यवस्था में शामिल बैंकों, पेमेंट सर्विस प्रोवाइडर्स और अन्य संबंधित संस्थाओं के बीच वितरित होता है।
ऐसे में अब सुप्रीम कोर्ट में दाखिल याचिका के जरिए इस व्यवस्था की वैधानिकता और इसके संभावित प्रभाव पर न्यायिक परीक्षण की मांग की गई है। याचिका पर अदालत की ओर से आगे क्या रुख अपनाया जाता है, इस पर निगाह रहेगी।