
बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण आदेश में स्पष्ट किया है कि छत्तीसगढ़ नर्सिंग होम अधिनियम एवं संबंधित नियमों के तहत नगर निगम को किसी नर्सिंग होम को सील करने का वैधानिक अधिकार प्राप्त नहीं है। कोर्ट ने कहा कि नर्सिंग होम एवं क्लिनिकल संस्थानों के नियमन और निगरानी के लिए अधिनियम के तहत सक्षम प्राधिकारी जिला कलेक्टर है। नगर निगम आयुक्त इस आधार पर नर्सिंग होम को सील करने की कार्रवाई नहीं कर सकते।
जस्टिस अमितेंद्र किशोर प्रसाद की एकलपीठ ने नगर निगम आयुक्त द्वारा जारी उस नोटिस को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई की, जिसके आधार पर संबंधित नर्सिंग होम को कथित अनियमितताओं, नर्सिंग होम अधिनियम के प्रावधानों का पालन नहीं करने और जैव-चिकित्सीय अपशिष्ट प्रबंधन नियमों के उल्लंघन के आरोप में सील किया गया था।
याचिकाकर्ता की ओर से दलील दी गई कि नगर निगम आयुक्त के पास नर्सिंग होम को सील करने का कोई वैधानिक अधिकार नहीं है। इसके बावजूद नोटिस जारी कर परिसर को सील किया गया, जो अधिकार क्षेत्र से बाहर की कार्रवाई है। याचिकाकर्ता ने यह भी तर्क दिया कि इस कार्रवाई से संविधान के अनुच्छेद 19(1)(जी) के तहत व्यापार एवं व्यवसाय करने के मौलिक अधिकार का उल्लंघन हुआ है।
लाइसेंस निलंबन और रद्द करने की अलग प्रक्रिया
हाईकोर्ट ने छत्तीसगढ़ राज्य उपचारगृह तथा रोगोपचार संबंधी स्थापनाएं अनुज्ञापन अधिनियम, 2010 की धारा 9 का उल्लेख करते हुए कहा कि नर्सिंग होम का लाइसेंस निलंबित या रद्द करने की प्रक्रिया कानून में निर्धारित है। इसके तहत सक्षम प्राधिकारी को प्रस्तावित कार्रवाई के आधार और कारण बताते हुए 30 दिन का नोटिस देना होता है। संबंधित पक्ष को अपना पक्ष रखने और सुनवाई का अवसर देने के बाद ही कारणयुक्त आदेश पारित किया जा सकता है।
कोर्ट ने कहा कि अधिनियम अथवा नियमों में नगर निगम को नर्सिंग होम का लाइसेंस जारी करने, उसका नियमन करने अथवा लाइसेंस रद्द करने का अधिकार नहीं दिया गया है। इसी प्रकार नगर निगम के पास नर्सिंग होम को सील करने की भी कोई वैधानिक शक्ति नहीं है।
नगर निगम की कार्रवाई को माना अधिकार क्षेत्र से बाहर
हाईकोर्ट ने कहा कि दुर्ग नगर निगम को नर्सिंग होम का लाइसेंस जारी करने, उसका नियमन करने या लाइसेंस रद्द करने का अधिकार नहीं है। ऐसे में वैधानिक अधिकार के अभाव में नगर निगम आयुक्त द्वारा 15 दिसंबर 2022 को नोटिस जारी कर नर्सिंग होम को सील करना स्पष्ट कानूनी त्रुटि थी।
सुनवाई के दौरान यह भी सामने आया कि नगर निगम ने अदालत के समक्ष स्वीकार किया था कि नर्सिंग होम अधिनियम के तहत जिला कलेक्टर सक्षम प्राधिकारी हैं।
नियमों के पालन की जिम्मेदारी बनी रहेगी
हालांकि हाईकोर्ट ने यह स्पष्ट किया कि नर्सिंग होम संचालक जैव-चिकित्सीय अपशिष्ट प्रबंधन नियमों सहित अन्य वैधानिक लाइसेंस और नियामकीय आवश्यकताओं का पालन करने के लिए बाध्य है। यदि किसी प्रकार का उल्लंघन पाया जाता है तो सक्षम प्राधिकारी कानून में निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार कार्रवाई कर सकता है।
इन टिप्पणियों के साथ हाईकोर्ट ने नगर निगम आयुक्त द्वारा 15 दिसंबर 2022 को जारी नोटिस तथा उसके आधार पर नर्सिंग होम को सील करने की कार्रवाई को रद्द कर दिया और रिट याचिका का निराकरण कर दिया।