
नई दिल्ली/रायपुर। सुप्रीम कोर्ट ने छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल को तत्काल राहत देने से इनकार करते हुए उनकी उस याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें उन्होंने वर्ष 2023 के विधानसभा चुनाव में अपनी जीत को चुनौती देने वाली चुनाव याचिका को प्रारंभिक स्तर पर ही निरस्त करने की मांग की थी। हालांकि, शीर्ष अदालत ने उन्हें ट्रायल के दौरान हाईकोर्ट के समक्ष अपनी सभी कानूनी और तथ्यात्मक आपत्तियां उठाने की स्वतंत्रता प्रदान की है।
चीफ जस्टिस सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहन की खंडपीठ ने यह आदेश भाजपा नेता विजय बघेल द्वारा दायर चुनाव याचिका के संबंध में पारित किया।
याचिका में आरोप लगाया गया है कि भूपेश बघेल ने मतदान से 48 घंटे पहले लागू ‘साइलेंस पीरियड’ के दौरान रोड शो किया, जो Representation of the People Act, 1951 की धारा 126 का उल्लंघन है।
सुनवाई के दौरान भूपेश बघेल की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने तर्क दिया कि धारा 126 का उल्लंघन केवल एक चुनावी अपराध (Electoral Offence) है, इसे भ्रष्ट आचरण (Corrupt Practice) नहीं माना जा सकता। उन्होंने यह भी कहा कि कथित रोड शो का चुनाव परिणाम पर कोई प्रभाव नहीं पड़ा, क्योंकि बघेल ने लगभग 20 हजार मतों के अंतर से जीत दर्ज की थी।
इस पर न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची ने कहा कि कथित उल्लंघन का चुनाव परिणाम पर प्रभाव पड़ा या नहीं, यह साक्ष्यों के आधार पर तय होने वाला तथ्यात्मक प्रश्न है, जिसका निर्णय ट्रायल के दौरान ही किया जा सकता है।
सुप्रीम कोर्ट ने मामले में हस्तक्षेप करने से इनकार करते हुए भूपेश बघेल की याचिका खारिज कर दी। साथ ही स्पष्ट किया कि चुनाव याचिका की सुनवाई के दौरान वे हाईकोर्ट के समक्ष अपनी सभी कानूनी और तथ्यात्मक दलीलें तथा आपत्तियां उठाने के लिए स्वतंत्र रहेंगे।