
राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के विशेष निगरानीकर्ता ने किया कामधेनु विश्वविद्यालय का निरीक्षण
दुर्ग, दाऊ श्री वासुदेव चन्द्राकर कामधेनु विश्वविद्यालय, दुर्ग में गुरुवार, 23 जुलाई को राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (नई दिल्ली) के विशेष निगरानीकर्ता प्राध्यापक कन्हैया त्रिपाठी के आगमन पर एक विशेष जागरूकता एवं संवाद कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों, शोधार्थियों और शिक्षकों के बीच मानवाधिकारों, लैंगिक समानता, साइबर सुरक्षा तथा सामाजिक उत्तरदायित्व के प्रति जागरूकता बढ़ाना था।
विभिन्न समितियों के साथ की गई अहम बैठक
इस अवसर पर प्राध्यापक कन्हैया त्रिपाठी ने विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. आर.आर.बी. सिंह, कुलसचिव, अधिष्ठाता, निदेशकों सहित मानवाधिकार से जुड़ी विभिन्न समितियों— जैसे एंटी रैगिंग समिति, अनुशासनात्मक समिति और महिला उत्पीड़न रोकथाम समिति— के अध्यक्षों व सदस्यों के साथ महत्वपूर्ण बैठक की।
विश्वविद्यालय संवैधानिक मूल्यों के संवर्धन का केंद्र: कुलपति
बैठक के दौरान कुलपति डॉ. आर.आर.बी. सिंह ने विश्वविद्यालय की रूपरेखा प्रस्तुत करते हुए बताया कि इसके अंतर्गत दो पशु चिकित्सा महाविद्यालय (अंजोरा व बिलासपुर), एक मात्स्यिकी महाविद्यालय (कवर्धा), एक डेयरी प्रौद्योगिकी महाविद्यालय (रायपुर) और सात पॉलीटेक्निक संचालित हैं। यहां स्नातक, स्नातकोत्तर, पी.एच.डी. और डिप्लोमा के पाठ्यक्रम चलाए जा रहे हैं। डॉ. सिंह ने जोर देते हुए कहा, “विश्वविद्यालय केवल ज्ञान का केन्द्र नहीं है, बल्कि संवैधानिक मूल्यों, मानवीय गरिमा और सामाजिक उत्तरदायित्वों के संवर्धन का प्रमुख माध्यम भी है। विद्यार्थियों में मानवाधिकारों एवं कर्तव्यों के प्रति जागरूकता विकसित करना समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है।”
साइबर हाइजीन और लैंगिक समानता पर जोर
राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के स्पेशल मॉनीटर प्रो. कन्हैया त्रिपाठी ने अपने संबोधन में स्पष्ट किया कि प्रत्येक विश्वविद्यालय में एक ‘मानव अधिकार सेल’ का गठन अनिवार्य रूप से किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि छात्र-छात्राओं में संवेदनशीलता और जागरूकता के विकास के लिए समय-समय पर लैंगिक समानता और साइबर अपराध जैसे विषयों पर संगोष्ठियां आयोजित की जानी चाहिए।
वर्तमान डिजिटल युग को देखते हुए प्रो. त्रिपाठी ने ‘साइबर हाइजीन’ (Cyber Hygiene) के महत्व पर विशेष चर्चा की। उन्होंने साइबर अपराधों से बचाव, सुरक्षित डिजिटल व्यवहार और सोशल मीडिया के जिम्मेदारीपूर्ण उपयोग को लेकर अहम सुझाव दिए।
अपने प्रवास के दौरान प्रो. त्रिपाठी ने विश्वविद्यालय के छात्रावासों का भी भ्रमण किया। उन्होंने वहां की वास्तविक स्थिति का जायजा लिया और विद्यार्थियों की समस्याओं को करीब से सुना। इस पूरे भ्रमण और कार्यक्रम के दौरान विश्वविद्यालय के निदेशकगण, कुलसचिव, अधिष्ठाता एवं जनसंपर्क अधिकारी प्रमुख रूप से उपस्थित रहे।