बिना थर्ड-पार्टी इंश्योरेंस वाली गाड़ियों को पेट्रोल देने पर रोक की सिफारिश, सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार और IRDA से मांगा पायलट प्रोजेक्ट

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बिना थर्ड-पार्टी इंश्योरेंस वाली गाड़ियों को पेट्रोल देने पर रोक की सिफारिश, सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार और IRDA से मांगा पायलट प्रोजेक्ट

नई दिल्ली। सड़क सुरक्षा और मोटर वाहन बीमा नियमों के प्रभावी पालन को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार, सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH) तथा इंश्योरेंस रेगुलेटरी एंड डेवलपमेंट अथॉरिटी (IRDAI) को महत्वपूर्ण निर्देश दिए हैं। न्यायालय ने सुझाव दिया है कि एक पायलट प्रोजेक्ट तैयार किया जाए, जिसके तहत पेट्रोल पंपों पर वाहनों के वैध थर्ड-पार्टी इंश्योरेंस की जांच की जा सके और बिना वैध बीमा वाली गाड़ियों को पेट्रोल देने से रोका जा सके।


जस्टिस संजय करोल और जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा की खंडपीठ ने स्पष्ट किया कि यह कोई अनिवार्य आदेश (Mandamus) नहीं, बल्कि एक नीतिगत सिफारिश है। अदालत ने कहा कि IRDAI और MoRTH आपसी समन्वय से ऐसा पायलट प्रोजेक्ट तैयार करें, जिसमें वाहन के इंश्योरेंस स्टेटस को पेट्रोल वितरण प्रणाली से जोड़ा जाए। यदि किसी वाहन का वैध थर्ड-पार्टी इंश्योरेंस नहीं है तो उसे बीमा कराने तक पेट्रोल न दिया जाए।


सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इस व्यवस्था से बिना बीमा और बिना पंजीकरण वाले वाहनों की पहचान आसान होगी तथा वाहन मालिकों को मोटर वाहन अधिनियम, 1988 की धारा 146 के तहत अनिवार्य थर्ड-पार्टी इंश्योरेंस कराने के लिए प्रोत्साहन मिलेगा। अदालत ने यह भी उल्लेख किया कि इस व्यवस्था को ANPR (ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकग्निशन) कैमरों की मदद से लागू किया जा सकता है और पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने सिद्धांततः इस पर कोई आपत्ति नहीं जताई है।


सुनवाई के दौरान अदालत ने दो प्रमुख मुद्दों पर विचार किया। पहला, सभी वाहनों के लिए वैध थर्ड-पार्टी इंश्योरेंस अनिवार्य करने वाली धारा 146 का प्रभावी पालन सुनिश्चित करना और दूसरा, क्या भविष्य में ऐसा समान मोटर बीमा ढांचा तैयार किया जाए जिसमें थर्ड-पार्टी जोखिम के साथ वाहन में सवार सभी लोगों का भी पर्याप्त बीमा कवरेज शामिल हो।


सुप्रीम कोर्ट ने यह भी सुझाव दिया कि नागरिकों के लिए ऐसी व्यवस्था विकसित की जाए, जिससे वे किसी भी वाहन का इंश्योरेंस स्टेटस आसानी से सत्यापित कर सकें। इसमें यह भी स्पष्ट हो कि वाहन केवल अनिवार्य थर्ड-पार्टी बीमा के तहत कवर है या उसके पास व्यापक (कॉम्प्रिहेंसिव) बीमा पॉलिसी है। अदालत के अनुसार इससे यात्रियों, माल भेजने वाले लोगों और कर्मचारियों को वाहन के बीमा की जानकारी मिल सकेगी, वहीं बिना बीमा वाले वाहनों की तुरंत रिपोर्टिंग भी संभव हो सकेगी।

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