बीमा कंपनी की मनमानी पर लगाम: ओरिएंटल इंश्योरेंस को राइस मिल संचालक को 43.30 लाख रुपये मय ब्याज चुकाने का आदेश…

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बीमा कंपनी की मनमानी पर लगाम: ओरिएंटल इंश्योरेंस को राइस मिल संचालक को 43.30 लाख रुपये मय ब्याज चुकाने का आदेश…

राज्य उपभोक्ता आयोग ने खारिज की बीमा कंपनी की अपील, दुर्ग जिला आयोग के फैसले को बरकरार रखते हुए बढ़ाई क्लेम राशि, IRDAI से भी होगी शिकायत

रायपुर/दुर्ग। बीमा दावों के निपटारे में मनमानी करने वाली बीमा कंपनियों के खिलाफ राज्य उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग, रायपुर ने एक महत्वपूर्ण और नजीर बनने वाला फैसला सुनाया है। आयोग ने ओरिएंटल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड की अपील को खारिज करते हुए दुर्ग जिले की एक राइस मिल कंपनी के पक्ष में बड़ा आदेश पारित किया है। आयोग ने बीमा कंपनी को निर्देश दिया है कि वह राइस मिल संचालक को 43 लाख 30 हजार 423 रुपये की क्लेम राशि 11 मार्च 2024 से 6 प्रतिशत वार्षिक ब्याज सहित अदा करे।

यह मामला दुर्ग जिले के ग्राम समोदा स्थित किशोर सारटेक्स एंड राइस मिल प्राइवेट लिमिटेड से जुड़ा है। कंपनी ने अपने प्लांट में स्थापित बूलर (Buhler) कंपनी की कलर सॉर्टर मशीन के इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों का बीमा ओरिएंटल इंश्योरेंस कंपनी से कराया था। मशीन का बीमा मूल्य 72 लाख रुपये था, जिसके लिए कंपनी ने 90 हजार 908 रुपये का प्रीमियम जमा किया था।

मशीन खराब होने के बाद शुरू हुआ विवाद
जानकारी के अनुसार 1 अक्टूबर 2023 को कलर सॉर्टर मशीन अचानक खराब हो गई, जिससे उत्पादन कार्य पूरी तरह प्रभावित हो गया। राइस मिल प्रबंधन ने तत्काल इसकी सूचना बीमा कंपनी को दी। बीमा कंपनी ने मामले की जांच के लिए सर्वेयर नियुक्त किया, लेकिन सर्वेयर ने रिपोर्ट प्रस्तुत करने में अत्यधिक देरी की।

राइस मिल प्रबंधन का आरोप था कि मशीन के वास्तविक मरम्मत खर्च का बिल 45 लाख 58 हजार 340 रुपये था, लेकिन बीमा कंपनी ने बिना किसी ठोस कानूनी आधार के और मूल उपकरण निर्माता (OEM) का हवाला देकर इस राशि को घटाकर केवल 20 लाख 55 हजार रुपये स्वीकार किया। मशीन बंद रहने से उत्पादन प्रभावित होने और आर्थिक नुकसान बढ़ने के कारण कंपनी ने आरएस सर्विसेस के माध्यम से मशीन की मरम्मत कराई तथा पूरा भुगतान स्वयं किया, लेकिन बीमा कंपनी ने उचित क्लेम देने से इनकार कर दिया।

जिला उपभोक्ता आयोग में मिली पहली राहत
बीमा कंपनी के रवैये से परेशान होकर किशोर सारटेक्स एंड राइस मिल के डायरेक्टर कृष्णा अग्रवाल ने अपने अधिवक्ता कमल नयन चतुर्वेदी के माध्यम से जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग, दुर्ग में परिवाद प्रस्तुत किया।

मामले की सुनवाई के बाद जिला आयोग के अध्यक्ष संतोष कुमार तथा सदस्य नीलू ठाकुर और संध्या वाजपेयी की पीठ ने 28 जुलाई 2025 को फैसला सुनाते हुए बीमा कंपनी को सेवा में कमी तथा अनुचित व्यापारिक व्यवहार का दोषी माना। आयोग ने बीमा कंपनी को 40 लाख रुपये मरम्मत खर्च, 1.50 लाख रुपये मानसिक प्रताड़ना तथा 7 हजार रुपये वाद व्यय के रूप में भुगतान करने का आदेश दिया था।

राज्य आयोग ने बढ़ाई क्लेम राशि
जिला आयोग के आदेश के खिलाफ ओरिएंटल इंश्योरेंस कंपनी ने राज्य उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग, रायपुर में अपील दायर की। वहीं राइस मिल की ओर से अधिवक्ता कमल नयन चतुर्वेदी ने काउंटर अपील प्रस्तुत कर वास्तविक भुगतान किए गए मरम्मत बिल के आधार पर पूरी राशि दिलाने की मांग की।

मामले की सुनवाई के बाद राज्य आयोग ने बीमा कंपनी की अपील को पूरी तरह निराधार और तथ्यहीन मानते हुए खारिज कर दिया। साथ ही उपभोक्ता की अपील स्वीकार करते हुए क्लेम राशि को बढ़ाकर 43 लाख 30 हजार 423 रुपये कर दिया। आयोग ने यह भी आदेश दिया कि उक्त राशि पर 11 मार्च 2024 से 6 प्रतिशत वार्षिक ब्याज का भुगतान किया जाए।

बीमा कंपनियों की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल
मामले में सफलता मिलने के बाद अधिवक्ता कमल नयन चतुर्वेदी ने कहा कि यह फैसला उन हजारों बीमाधारकों के लिए उम्मीद की किरण है, जिनके वैध दावों को बीमा कंपनियां विभिन्न तकनीकी आधारों पर खारिज या कम कर देती हैं। उन्होंने कहा कि बीमा कंपनियों द्वारा अपनाई जा रही अनुचित व्यापारिक प्रथाओं पर अंकुश लगाने के लिए इस आदेश की प्रति भारतीय बीमा विनियामक एवं विकास प्राधिकरण (IRDA) तथा वित्त मंत्रालय के वित्तीय सेवा विभाग (DFS) को भेजी जाएगी।

उन्होंने कहा कि शिकायत का उद्देश्य केवल इस मामले में न्याय प्राप्त करना नहीं, बल्कि भविष्य में किसी भी बीमाधारक के साथ इस प्रकार की मनमानी और शोषण को रोकना है।

उपभोक्ताओं के लिए बना मिसाल
कानूनी जानकारों के अनुसार यह फैसला उपभोक्ता अधिकारों की रक्षा की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। राज्य आयोग का यह आदेश स्पष्ट संदेश देता है कि बीमा कंपनियां मनमाने ढंग से क्लेम राशि में कटौती नहीं कर सकतीं और यदि ऐसा किया जाता है तो उपभोक्ता आयोग उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई कर सकता है।

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