
स्वास्थ्य विभाग और टाटा ट्रस्ट की पहल, बच्चों में बीमारी के शुरुआती लक्षण पहचानने पर दिया गया जोर
दुर्ग। स्वास्थ्य विभाग दुर्ग द्वारा टाटा ट्रस्ट के सहयोग से धमधा विकासखंड में स्कूल हेल्थ एंड वेलनेस एम्बेसडर कार्यक्रम के अंतर्गत शिक्षकों के लिए प्रशिक्षण आयोजित किया गया। इसमें शिक्षकों को विद्यार्थियों के स्वास्थ्य एवं कल्याण से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां देने के साथ बच्चों में टाइप-1 डायबिटीज (T1D) के लक्षणों की पहचान और समय पर उपचार सुनिश्चित करने के संबंध में जागरूक किया गया।
प्रशिक्षण के दौरान विलियम जे. क्लिंटन फाउंडेशन (WJCF) के कंसल्टेंट ने शिक्षकों को टाइप-1 डायबिटीज के प्रमुख लक्षणों, बीमारी की शुरुआती पहचान तथा समय पर उपचार के महत्व की जानकारी दी। उन्हें बताया गया कि बच्चों में इस बीमारी के संभावित लक्षण दिखाई देने पर लापरवाही नहीं बरतनी चाहिए और उचित जांच एवं उपचार के लिए समय रहते स्वास्थ्य केंद्र तक पहुंचाना जरूरी है।
शिक्षकों को ऐसे बच्चों को आगे की जांच और उपचार के लिए जिला शीघ्र हस्तक्षेप केंद्र (DEIC) में रेफर करने की प्रक्रिया के बारे में भी बताया गया। इस प्रशिक्षण का उद्देश्य शिक्षकों को स्वास्थ्य संबंधी जानकारी देकर स्कूल स्तर पर बच्चों में टाइप-1 डायबिटीज के संभावित मामलों की समय पर पहचान करना और उन्हें आवश्यक चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराने में सहयोग करना है।
स्वास्थ्य विभाग की इस पहल से शिक्षकों की भूमिका केवल शिक्षा तक सीमित न रहकर विद्यार्थियों के स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ाने में भी महत्वपूर्ण साबित हो सकती है। समय पर लक्षणों की पहचान और उचित रेफरल से बच्चों को आवश्यक उपचार दिलाने में मदद मिल सकती है।