​किताबें डिग्री देती हैं, संस्कार बनाते हैं व्यक्तित्व : आचार्य डॉ. अजय आर्य

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​किताबें डिग्री देती हैं, संस्कार बनाते हैं व्यक्तित्व : आचार्य डॉ. अजय आर्य

एवीएस में ‘मोरल टॉक’ का शानदार शुभारंभ; मिले सफल, संतुलित और तनावमुक्त जीवन के तीन सूत्र

दुर्ग। शिक्षा का वास्तविक उद्देश्य केवल अच्छे अंक प्राप्त करना या ऊँची नौकरी पाना नहीं है, बल्कि एक संवेदनशील, संस्कारी और जिम्मेदार इंसान बनना है। यदि किताबी ज्ञान आपके व्यवहार में नहीं झलकता, तो वह शिक्षा अधूरी है। इन्हीं विचारों के साथ एवीएस (AVS) में ‘मोरल टॉक’ कार्यक्रम का भव्य शुभारंभ हुआ। इसके प्रथम सत्र में मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित आचार्य डॉ. अजय आर्य ने उपस्थित शिक्षकों व स्टाफ को सफल, संतुलित और तनावमुक्त जीवन के अमूल्य सूत्र दिए।


​कार्यक्रम की शुरुआत एवीएस के डायरेक्टर डॉ. अवधेश प्रसाद मौर्य एवं प्राचार्य सुष्मिता दास द्वारा आचार्य डॉ. अजय आर्य का आम्रवृक्ष भेंट कर स्वागत करने के साथ हुई। अपने स्वागत उद्बोधन में डॉ. मौर्य ने कहा कि आज शिक्षा केवल परीक्षा और प्रतियोगिता तक सिमट गई है। कई बार पढ़ाई में उत्कृष्ट विद्यार्थी भी व्यावहारिक जीवन में पिछड़ जाते हैं। इसी चिंता को दूर करने और व्यावहारिक ज्ञान देने के उद्देश्य से विद्यालय में ‘मोरल टॉक’ की शुरुआत की गई है।

आचार्य डॉ. अजय आर्य ने अपने ओजस्वी संबोधन में कहा, “ज़िंदगी को समझना है तो कुछ देर के लिए किताबों से बाहर निकलकर जीवन को देखिए। सत्य बोलने का साहस, मुस्कुराकर अभिवादन करना और विनम्रता से संवाद करना ही व्यक्ति को महान बनाता है।” उन्होंने जीवन को संवारने के लिए तीन प्रमुख आदतों पर जोर दिया:

मुस्कान: यह सबसे सरल और मूल्यवान उपहार है। मुस्कुराकर मिलने वाला व्यक्ति बिना कुछ कहे ही सबका मन जीत लेता है।


विनम्रता: भारतीय संस्कृति में अभिवादन केवल औपचारिकता नहीं, जीवंत संस्कार है। (इस दौरान उन्होंने एक रोचक प्रसंग सुनाते हुए कहा कि आजकल बच्चे मोबाइल पर ‘गुड मॉर्निंग’ भेजकर औपचारिकता पूरी कर लेते हैं, लेकिन हाथ जोड़कर किया गया अभिवादन सीधे हृदय तक पहुँचता है।)


जिम्मेदारी: अपनी असफलताओं का दोष परिस्थितियों या दूसरों पर डालना बंद करें। बहाने सफलता नहीं दिलाते, बल्कि अपनी जिम्मेदारी स्वीकार करने वाला ही जीवन में आगे बढ़ता है।

प्रश्नोत्तर सत्र के दौरान शिक्षिका रश्मि त्रिवेदी ने कार्य के बढ़ते दबाव और तनाव को लेकर प्रश्न किया। इसका अत्यंत सहज उत्तर देते हुए आचार्य डॉ. अजय आर्य ने कहा, “वास्तविक समस्या काम की मात्रा नहीं, बल्कि काम के प्रति हमारा दृष्टिकोण है। जिस कार्य को हम अपना मान लेते हैं, उसमें थकान कम और आनंद अधिक महसूस होता है। जैसे माता-पिता बच्चों की सेवा को बोझ नहीं मानते, वैसे ही यदि संस्था को अपना परिवार मान लिया जाए तो तनाव स्वतः कम हो जाएगा।”


​हर महीने होगा ‘मोरल टॉक’ का आयोजन
कार्यक्रम के अंत में विद्यालय प्रबंधन ने घोषणा की कि ‘मोरल टॉक’ का यह प्रेरक आयोजन अब हर महीने होगा। आगामी सत्रों में शिक्षकों और विद्यार्थियों के साथ-साथ अभिभावकों और युवाओं को भी आमंत्रित किया जाएगा ताकि तनाव, अवसाद, समय प्रबंधन और सकारात्मक सोच जैसे विषयों पर खुलकर चर्चा हो सके।


​इस अवसर पर शिक्षिका रश्मि सिंह, दामिनी राहड़े, आकांक्षा बेल चंदन, शिवानी गोखले, आकांक्षा तिवारी, अनामिका सिन्हा, पलक लिवानी, निशु कुमारी, संगीता गोस्वामी, रश्मि त्रिवेदी, नम्रता सिंह यादव, सरिता मोहंती, अनुभा अग्रवाल, सुमन यादव एवं शारदा शुक्ला तथा शिक्षक सोहन लाल और विशाल कुमार नाग सहित पूरा विद्यालय परिवार उपस्थित रहा।

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