
रायपुर। मानवता और अंगदान की प्रेरणादायक मिसाल पेश करते हुए 12 वर्षीय सुमना कुंडू ने अपनी मृत्यु के बाद दो लोगों को नई जिंदगी दे दी। दुर्लभ आनुवांशिक बीमारी ‘पाइकिनोडायसोस्टोसिस’ से पीड़ित सुमना का इलाज एम्स रायपुर में चल रहा था। उपचार के दौरान डॉक्टरों ने उसे ब्रेन डेड घोषित कर दिया। इस कठिन और भावुक क्षण में सुमना के माता-पिता ने अपनी बेटी के अंगदान का हृदय विदारक लेकिन साहसिक निर्णय लिया।
सुमना के माता-पिता की सहमति के बाद उसकी दोनों किडनियों का सफलतापूर्वक प्रत्यारोपण किया गया। इस अंगदान से दो मरीजों को नया जीवन मिला है। इनमें एक 15 वर्षीय किशोर शामिल है, जो पिछले तीन वर्षों से डायलिसिस पर निर्भर था। वहीं दूसरी किडनी 45 वर्षीय एक मरीज को प्रत्यारोपित की गई। अस्पताल प्रबंधन के अनुसार दोनों मरीजों की स्थिति स्थिर है और उनका स्वास्थ्य लगातार बेहतर हो रहा है।
यह उपलब्धि इसलिए भी विशेष है क्योंकि यह एम्स रायपुर का पहला पीडियाट्रिक (बाल) ऑर्गन डोनेशन है। इस ऐतिहासिक पहल ने प्रदेश में अंगदान के प्रति नई जागरूकता और उम्मीद जगाई है।
एम्स रायपुर के कार्यकारी निदेशक लेफ्टिनेंट जनरल अशोक जिंदल ने सुमना के परिवार के निर्णय को मानवता की सर्वोच्च मिसाल बताते हुए कहा कि अत्यंत दुखद परिस्थितियों में लिया गया यह फैसला न केवल दो लोगों के जीवन को बचाने वाला साबित हुआ है, बल्कि समाज में अंगदान के प्रति सकारात्मक संदेश भी देगा।
सुमना की कहानी यह दर्शाती है कि जीवन की अंतिम घड़ी में भी किसी का निर्णय कई परिवारों के लिए नई उम्मीद और खुशियां लेकर आ सकता है। यह अंगदान समाज के लिए प्रेरणा और मानवता के प्रति समर्पण का एक अद्वितीय उदाहरण बन गया है।