PSU कर्मचारियों के बच्चों की फीस भरने से निजी स्कूल RTI के दायरे में नहीं आता: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट

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PSU कर्मचारियों के बच्चों की फीस भरने से निजी स्कूल RTI के दायरे में नहीं आता: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट

हाईकोर्ट ने कहा- SECL की कॉन्ट्रैक्ट आधारित वित्तीय व्यवस्था को ‘सब्स्टैंशियल फाइनेंसिंग’ नहीं माना जा सकता, CIC के आदेश निरस्त।

बिलासपुर।छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में स्पष्ट किया है कि केवल इस आधार पर किसी निजी स्कूल को सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 (RTI) के तहत “पब्लिक अथॉरिटी” नहीं माना जा सकता कि कोई सार्वजनिक उपक्रम (PSU) अपने कर्मचारियों के बच्चों की रियायती फीस से होने वाले घाटे की भरपाई करता है। अदालत ने कहा कि ऐसी व्यवस्था अनुबंध (MoU) पर आधारित होती है और इसे अधिनियम की धारा 2(h) के तहत “पर्याप्त वित्तपोषण” (Substantial Financing) नहीं माना जा सकता।

जस्टिस अमितेंद्र किशोर प्रसाद की एकलपीठ ने DAV पब्लिक स्कूल द्वारा दायर कई रिट याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए केंद्रीय सूचना आयोग (CIC) के उन आदेशों को निरस्त कर दिया, जिनमें स्कूल को “पब्लिक अथॉरिटी” घोषित किया गया था तथा प्राचार्य को “डीम्ड पब्लिक इन्फॉर्मेशन ऑफिसर” मानते हुए सूचना उपलब्ध कराने और दंडित करने के निर्देश दिए गए थे।

सेवा समाप्ति के बाद शुरू हुआ विवाद
मामले की शुरुआत तब हुई जब एक महिला कर्मचारी, जो DAV पब्लिक स्कूल में एड-हॉक आधार पर कार्यरत थीं, उनकी सेवा समाप्त कर दी गई। इसके बाद उनके पति ने संबंधित जानकारी प्राप्त करने के लिए साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (SECL) के केंद्रीय जन सूचना अधिकारी (CPIO) के समक्ष RTI आवेदन प्रस्तुत किया। स्कूल ने लगातार यह आपत्ति उठाई कि वह RTI अधिनियम के तहत सार्वजनिक प्राधिकरण नहीं है, लेकिन CIC ने स्कूल को सूचना देने का निर्देश दिया था।

कोर्ट ने क्या कहा
हाईकोर्ट ने कहा कि किसी निजी संस्था को RTI के दायरे में लाने के लिए यह आवश्यक है कि उस पर सरकार या सरकारी संस्था का स्वामित्व, प्रशासनिक नियंत्रण अथवा पर्याप्त वित्तीय सहायता हो। केवल अनुदान, सब्सिडी, रियायत या अनुबंध के तहत दी गई वित्तीय सहायता को “सब्स्टैंशियल फाइनेंसिंग” नहीं माना जा सकता।


अदालत ने पाया कि DAV पब्लिक स्कूल का संचालन स्वतंत्र रूप से DAV कॉलेज मैनेजिंग कमेटी द्वारा किया जाता है। स्कूल का अपना अलग वित्तीय ढांचा है और उस पर SECL का न तो स्वामित्व है और न ही प्रशासनिक नियंत्रण। SECL द्वारा कर्मचारियों के बच्चों की रियायती फीस से होने वाले घाटे की भरपाई केवल एक अनुबंध आधारित व्यवस्था है।

प्राचार्य को PIO नहीं माना जा सकता
हाईकोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि RTI अधिनियम की धारा 5(4) और 5(5) के तहत “डीम्ड पब्लिक इन्फॉर्मेशन ऑफिसर” का प्रावधान केवल सार्वजनिक प्राधिकरणों पर लागू होता है। चूंकि DAV पब्लिक स्कूल सार्वजनिक प्राधिकरण नहीं है, इसलिए उसके प्राचार्य को जन सूचना अधिकारी नहीं माना जा सकता।

CIC के आदेश रद्द
अदालत ने सभी तथ्यों और कानूनी प्रावधानों पर विचार करते हुए DAV पब्लिक स्कूल की रिट याचिकाएं स्वीकार कर लीं तथा केंद्रीय सूचना आयोग के विवादित आदेशों को निरस्त कर दिया। यह फैसला निजी शैक्षणिक संस्थानों की RTI के तहत जवाबदेही के दायरे को स्पष्ट करने वाला महत्वपूर्ण निर्णय माना जा रहा है।

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