दुर्ग/भिलाई

न्यायपालिका की शक्ति दक्षता, निष्पक्षता और न्याय के प्रति समर्पण में: मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा

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  • दुर्ग में संभाग स्तरीय न्यायिक सेमिनार आयोजित, 120 न्यायिक अधिकारियों ने लिया हिस्सा
  • नए आपराधिक कानूनों और ई-साक्ष्य की बारीकियों पर हुआ गहन मंथन

दुर्ग, छत्तीसगढ़ राज्य न्यायिक अकादमी द्वारा जिला न्यायालय दुर्ग में शनिवार को दुर्ग संभाग के न्यायिक अधिकारियों के लिए एक दिवसीय संभागीय न्यायिक सेमिनार का आयोजन किया गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधिपति एवं मुख्य संरक्षक माननीय श्री न्यायमूर्ति रमेश सिन्हा थे। उन्होंने दीप प्रज्वलन कर सेमिनार का विधिवत शुभारंभ किया। इस अवसर पर उच्च न्यायालय की माननीय न्यायमूर्ति रजनी दुबे एवं माननीय न्यायमूर्ति रवीन्द्र कुमार अग्रवाल भी विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे।

नए कानून: आधुनिक और पीड़ित-केंद्रित

​संबोधन के दौरान मुख्य न्यायाधिपति न्यायमूर्ति रमेश सिन्हा ने नए अधिनियमित आपराधिक कानूनों को न्यायिक प्रणाली के आधुनिकीकरण की दिशा में क्रांतिकारी कदम बताया। उन्होंने कहा कि:

​”ये कानून तकनीकी प्रगति का समावेश करते हुए अधिक प्रभावी और पीड़ित-केंद्रित दृष्टिकोण को बढ़ावा देते हैं। न्यायिक अधिकारियों को इनका स्पष्ट और व्यावहारिक ज्ञान होना अनिवार्य है ताकि इनका प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित हो सके।”

लंबित प्रकरणों और डिजिटल साक्ष्य पर जोर

​मुख्य न्यायाधीश ने चेक बाउंस (धारा 138 एन.आई. एक्ट) के मामलों के शीघ्र निपटारे के लिए नवाचारी प्रबंधन तकनीकों को अपनाने पर बल दिया। इसके साथ ही, उन्होंने बदलते परिवेश में इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य (E-Evidence) की बढ़ती महत्ता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि न्यायिक अधिकारियों को डिजिटल साक्ष्य और भारतीय साक्ष्य अधिनियम के तकनीकी प्रावधानों से अपडेट रहना चाहिए।

‘मध्यस्थता 2.0’ पुस्तक का विमोचन

​सेमीनार के दौरान एक महत्वपूर्ण क्षण तब आया जब मुख्य न्यायाधिपति के कर-कमलों द्वारा ‘मध्यस्थता 2.0 आईएआईएसएजीआर – दुर्ग के लिए मध्यस्थता रणनीति मॉडल’ नामक पुस्तक का विमोचन किया गया। यह प्रकाशन भविष्य में विवादों के सौहार्दपूर्ण समाधान की दिशा में एक मार्गदर्शक की भूमिका निभाएगा।

सेमिनार के मुख्य आकर्षण

  • प्रतिभागी: दुर्ग, बालोद, बेमेतरा, कवर्धा और राजनांदगांव जिलों के कुल 120 न्यायिक अधिकारी।
  • प्रस्तुतिकरण: सिविल प्रक्रिया संहिता (आदेश 7 नियम 10 व 11), निष्पादन प्रकरणों का निराकरण और बी.एन.एस.एस. (BNSS) के अंतर्गत अभियुक्त परीक्षण जैसे गंभीर विषयों पर चर्चा।
  • रिफ्रेशर कोर्स: भारतीय न्याय संहिता और भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता के प्रावधानों पर विशेष सत्र आयोजित किए गए।

प्रारंभ में, प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश, दुर्ग ने स्वागत भाषण दिया। इसके पश्चात छत्तीसगढ़ राज्य न्यायिक अकादमी की निदेशक श्रीमती निधि शर्मा तिवारी ने सेमिनार के उद्देश्यों पर प्रकाश डाला। कार्यक्रम का समापन द्वितीय जिला एवं अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश द्वारा धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ। इस अवसर पर उच्च न्यायालय के रजिस्ट्रार जनरल सहित रजिस्ट्री के वरिष्ठ अधिकारीगण भी उपस्थित थे।

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