6 सेकंड की स्पीड का दावा निकला गलत, Jaguar Land Rover को लौटाने होंगे ₹1.65 करोड़

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6 सेकंड की स्पीड का दावा निकला गलत, Jaguar Land Rover को लौटाने होंगे ₹1.65 करोड़

देहरादून। लग्जरी कार निर्माता कंपनी Jaguar Land Rover को भ्रामक विज्ञापन और खराब वाहन बेचने के मामले में बड़ा झटका लगा है। उत्तराखंड राज्य उपभोक्ता आयोग ने कंपनी को ग्राहक को ब्याज सहित ₹1.65 करोड़ से अधिक की राशि लौटाने का आदेश दिया है। आयोग ने माना कि कंपनी ने वाहन की स्पीड और फीचर्स को लेकर ग्राहकों को गुमराह किया तथा वाहन में गंभीर तकनीकी खामियां मौजूद थीं।


यह मामला लग्जरी SUV “Defender 110 X P400” से जुड़ा है, जिसे वर्ष 2022 में Eapro Global Limited ने खरीदा था। शिकायतकर्ता कंपनी का आरोप था कि वाहन खरीदते समय Jaguar Land Rover द्वारा दावा किया गया था कि कार महज 6.1 सेकंड में 0 से 100 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार पकड़ सकती है। हालांकि वास्तविक परीक्षण में वाहन को यह स्पीड हासिल करने में 7 सेकंड से अधिक समय लगा।

शिकायत में यह भी कहा गया कि वाहन में कई तकनीकी समस्याएं थीं। सबसे गंभीर मुद्दा “फ्यूल फ्लैप सेंट्रल लॉकिंग सिस्टम” का नहीं होना था, जो वाहन के महत्वपूर्ण सुरक्षा फीचर्स में शामिल माना जाता है। इसके अलावा ग्राहक ने आरोप लगाया कि सर्विसिंग के दौरान कंपनी ने बिना अनुमति वाहन के चेसिस में कटिंग और वेल्डिंग का काम किया, जिससे वाहन की मूल संरचना प्रभावित हुई।


सुनवाई के दौरान Jaguar Land Rover India की ओर से दलील दी गई कि विज्ञापन में बताई गई स्पीड केवल टेस्टिंग और आदर्श परिस्थितियों में संभव थी। कंपनी ने यह भी कहा कि वैश्विक चिप संकट के कारण कुछ फीचर्स उपलब्ध नहीं हो सके थे। लेकिन आयोग ने कंपनी की दलीलों को खारिज करते हुए कहा कि विज्ञापन में इस संबंध में कोई स्पष्ट चेतावनी या शर्त नहीं दी गई थी। आयोग ने इसे उपभोक्ताओं को भ्रमित करने वाला विज्ञापन माना।

आयोग ने अपने फैसले में कहा कि वाहन के चेसिस में बदलाव करना उसकी मूल संरचना से छेड़छाड़ है और यह गंभीर निर्माण दोष की श्रेणी में आता है। उपभोक्ता आयोग ने माना कि इतनी महंगी लग्जरी कार खरीदने वाले ग्राहक को अपेक्षित गुणवत्ता और फीचर्स नहीं दिए गए।


फैसले में आयोग ने Jaguar Land Rover India को निर्देश दिया कि वह ग्राहक को वाहन की पूरी कीमत करीब ₹1.65 करोड़ 7 प्रतिशत वार्षिक ब्याज सहित लौटाए। साथ ही कंपनी को ₹50 हजार मुकदमा खर्च के रूप में भी अदा करने होंगे। यह फैसला उपभोक्ता अधिकारों के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है और इससे ऑटोमोबाइल कंपनियों को अपने विज्ञापनों और उत्पाद गुणवत्ता को लेकर अधिक जवाबदेह होना पड़ सकता है।

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