
दुर्ग |जिले के ग्राम कुर्मीगुंडरा में खाद, बीज और पक्के आवास जैसी बुनियादी मांगों को लेकर ग्रामीणों का जल सत्याग्रह लगातार जारी है। अपनी मांगों को लेकर गांव के लक्ष्मी सागर तालाब के पानी में उतरे सत्याग्रहियों का हौसला डिगने के बजाय और मजबूत होता दिख रहा है। हालात यह हैं कि अब प्रदर्शनकारियों को तालाब के भीतर पानी के बीच ही भोजन पहुंचाया जा रहा है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, शासन-प्रशासन का ध्यान आकर्षित करने के लिए ग्राम कुर्मीगुंडरा के कई महिला और पुरुष ग्रामीण लक्ष्मी सागर तालाब में उतरकर जल सत्याग्रह कर रहे हैं। पानी में लगातार खड़े रहने के कारण जब सत्याग्रहियों को भूख लगी, तो गांव के अन्य लोगों ने एकजुटता की अनूठी मिसाल पेश की।
ग्रामीणों ने खुद के खर्च पर की भोजन की व्यवस्था
आंदोलनकारियों के समर्थन में खड़े ग्रामीणों ने अपने स्वयं के खर्च पर सामूहिक रूप से खिचड़ी तैयार की और उसे सीधे तालाब के अंदर पानी में खड़े सत्याग्रहियों तक पहुंचाया। महिलाओं और पुरुषों ने पानी के बीच ही खिचड़ी खाकर अपनी भूख मिटाई और अपना विरोध प्रदर्शन जारी रखा है।
प्रशासनिक अनदेखी से पनप रहा आक्रोश
ग्रामीणों का स्पष्ट कहना है कि वे खेती-किसानी के लिए खाद-बीज की किल्लत और सिर पर पक्की छत (आवास) न होने से लंबे समय से परेशान हैं। बार-बार गुहार लगाने के बाद भी जब सुनवाई नहीं हुई, तो उन्हें मजबूरन जल सत्याग्रह का रास्ता अपनाना पड़ा। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि जब तक प्रशासन उनकी मांगों पर कोई ठोस कदम नहीं उठाता, उनका यह जल सत्याग्रह यूं ही जारी रहेगा।
इस कड़े और अनोखे विरोध प्रदर्शन ने स्थानीय प्रशासन की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। तपती गर्मी और पानी के बीच डटे इन ग्रामीणों की सुध लेने अब तक कोई बड़ा अधिकारी मौके पर नहीं पहुंचा है, जिसे लेकर ग्रामीणों में भारी आक्रोश है।